संवाद न्यूज एजेंसी
छछरौली। कस्बे में सौतेली मां की प्रताड़ना से परेशान होकर दो बच्चे स्कूल के बाद घर जाने की बजाए कहीं बाहर निकल गए। बच्चे घूमते घूमते गांव मुंडाखेड़ा के खेतों में पहुंचे। इस दौरान लावारिस बच्चों को देख ग्रामीणों ने 112 पर इसकी सूचना दी। पुलिस ने बच्चों को रेस्क्यू किया और बालकुंज लेकर पहुंची। अधिकारियों ने बच्चों की चिकित्सीय जांच के बाद बालकुंज भेजने की बात कही। इस पर पेट्रोलिंग टीम ने बच्चों को थाना सदर जगाधरी पुलिस को सौंप दिया।
मुंडाखेड़ा के ग्रामीणों को गांव के पास खेतों में दो बच्चे घूमते दिखाई दिए। स्कूल की वर्दी पहने दोनों बच्चे बैग लिए थे। ग्रामीणों ने सोचा शायद बच्चे कहीं ट्यूशन पढ़ने आए या घर जा रहे हैं। काफी देर तक बच्चे घूमते रहे तो ग्रामीणों ने उनसे बात की। दोनों बहुत ही घबराए हुए थे। लड़का क्षेत्र के निजी स्कूल में नवीं और लड़की छठी कक्षा में पढ़ती है। मुंडा खेड़ा निवासी कंवर सिंह, विक्रम सिंह, शंटी ने बताया इस बारे में छछरौली के सरपंच प्रतिनिधि राजेश गोयल डमरु को भी सूचना दी गई। उसके बाद 112 पर फोन कर पुलिस बुलाई गई।
पुलिस बच्चों को बालकुंज छछरौली ले गई। बालकुंज अधिकारियों ने बच्चों को मेडिकल बाद बच्चों को यहां लाने की बात कहते उसे उन्हें लेने से मना कर दिया।इस दौरान एसआई दिलीप सिंह ने बताया कि उन्हें मुंडाखेड़ा से सूचना मिली थी कि दो छोटे बच्चे जो स्कूल की वर्दी में गांव के पास भटक रहे हैं। जिस पर उन्होंने बच्चों को बालकुंज कॉउंसलिंग के लिए भिजवाया। वहीं बालकुंज की तरफ से बच्चों को मेडिकल करवाने की बात कही। मेडिकल करवाने के बाद बच्चों को बालकुंज में सौंप दिया जाएगा। बालकुंज अधीक्षक मोना चौहान ने बताया की जगाधरी से पेट्रोलिंग टीम दो छोटे बच्चों को बालकुंज लेकर आई थी। उनकी तरफ से बच्चों का मेडिकल करवाने के लिए भेज दिया गया है। बच्चों का मेडिकल करवाने के बाद अगली कार्रवाई की जाएगी।
बच्चे बोले - कुत्ते से कटाते हैं मां-बाप
बालकुंज में काउंसलिंग के दौरान बच्चों का जो दर्द झलका कि हर किसी का दिल पसीज गया। बच्चों ने बताया कि उनकी मां सौतेली है। सौतेली मां के कारण उनका पिता भी उनसे बुरा सलूक करता है। दोनों उन्हें मारते पीटते रहते हैं। उनकी मां बुरी तरह डंडे व चिमटे से उन्हें मारती है। यही इतना नहीं वे कई बार उन्हें पालतू कुत्ते से कटवा चुके हैं। बच्चों ने कहा कि प्रताड़ना और मार से बचने के लिए वे स्कूल से घर जाने के बजाए भाग आए।