संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। वर्ष 2014 से बंद पड़े कैल कचरा प्रबंधन प्लांट से दस माह में 80 हजार टन ठोस कचरे का प्रबंधन हो गया है। जनवरी माह में शुरू हुए कचरे के प्रबंधन के दौरान आरडीएफ (रिफ्यूज डिलाइव फ्यूल), बायो सोयल व ईंट-कंकड़ अलग-अलग किया गया है। प्लांट में करीब सवा लाख टन कचरा था। जो रह गया है, उसका प्रबंधन दिसंबर माह तक किए जाने की उम्मीद है।
शहर से निकलने वाले कचरे के प्रबंधन के लिए कैल गांव में 18.74 करोड़ रुपये की लागत से सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट बनाया गया था। कुछ दिन ठीकठाक चलने के बाद प्लांट की गति धीमी पड़ गई। 21 दिसंबर 2012 के पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी सैलजा ने इसका उद्घाटन किया था, लेकिन दिसंबर 2014 में प्लांट बंद हो गया।
इससे यहां करीब सवा लाख टन कचरा जमा हो गया। इसके प्रबंधन के लिए जनवरी 2021 में बायोरेमेडिएशन तकनीक से कचरे का प्रबंधन करना शुरू किया। इसका ठेका भारत विकास ग्रुप को दिया गया। कंपनी द्वारा कैल प्लांट में पड़े कचरे का बेहतरी से प्रबंधन करना शुरू किया गया। प्रबंधन के दौरान प्लास्टिक, पेपर, फोम आदि से आरडीएफ (रिफ्यूज डिलाइव फ्यूल) तैयार किया जा रहा है।
इसे सीमेंट फैक्टरी व अन्य फैक्ट्रियों में ईंधन के रूप में इस्तेमाल के लिए बेचा जा रहा है। इसके अलावा बायो सोयल को लैंड फीलिग व भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए प्रयोग किया जा रहा है। भारत विकास ग्रुप के प्रोजेक्ट हेड गोपाल सिंह का कहना है कि दिसंबर 2021 में यह काम पूरा कर लिया जाएगा। यहां पड़े कचरे की छंटनी कर अलग-अलग उत्पाद के रूप में प्रयोग किया जा रहा है। आरडीएफ (रिफ्यूज डिलाइव फ्यूल) का प्रयोग उप्र व एनसीआर की औद्योगिक इकाइयों में प्रयोग किया जा रहा है।