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चूहों ने ले ली खतरनाक टाइगर की जान!

Sun, 20 Apr 2014 09:09 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, भिवानी
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हरियाणा के भिवानी में अब ब्रांडिस की दहाड़ सुनाई नहीं देगी। चिड़ियाघर के एकमात्र बाघ की शुक्रवार रात 10 बजे लेप्टास्पायरोसिस बीमारी से मौत हो गई। शनिवार को तीन डॉक्टरों ने पोस्टमार्टम के बाद छह सैंपल लेकर जांच के लिए आईवीआरआई बरेली भेजा है। ब्रांडिस को 2009 में बंगलूरू से यहां शिफ्ट किया गया था। शनिवार को ब्रांडिस नहीं दिखाई देने के कारण अनेक लोग खासकर बच्चों को निराशा हाथ लगी।
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बाघ ब्रांडिस लंबे समय से लेप्टास्पायरोसिस बीमारी (चूहों से होने वाले इन्फेक्शन से फैलती है) से पीड़ित था। चिड़ियाघर कर्मचारियों के मुताबिक मार्च महीने में उसका स्वास्थ्य कुछ सुधरा था और वह काफी घूमने-फिरने भी लगा था। चार अप्रैल को वह पूरी तरह फिट था और करीब डेढ़ घंटे पानी में नहाया। पांच अप्रैल से उसकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई और शुक्रवार रात करीब 10 बजे ब्रांडिस ने दम तोड़ दिया।

पोस्टमार्टम के बाद पहले अंतेष्टि की गई और फिर ब्रांडिस को साढ़े तीन बजे दफना दिया गया।

चूहों से फैलती है बीमारी

ब्रांडिस करीब तीन साल से लेप्टोस्पायरोसिस नामक जीवाणु से फैलने वाली बीमारी पीड़ित था। यह बीमारी चूहों के पेशाब से फैलती है। पिछले लंबे समय से स्थानीय डॉक्टरों की टीम पंजाब के विशेषज्ञों के निर्देशन में ब्रांडिस का इलाज कर रही थी। ब्रांडिस के पिंजरों के पास चूहे न आए इसके लिए भी व्यवस्था की गई थी। ब्रांडिस की हरेक गतिविधि पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरा भी लगाया गया था।

उम्रदराज हो गया था ब्रांडिस
वन अधिकारी शक्ति सिंह और चिड़ियाघर इंचार्ज सुरेंद्र कुमार ने बताया कि ब्रांडिस की उम्र करीब 16-17 वर्ष हो गई थी। वह बीमारी से भी पीड़ित था। बाघ की औसतन उम्र जंगल में करीब 10-12 साल ही होती है और चिड़ियाघर में बाघ 18 से 20 साल जीवित रहते हैं। अब ब्रांडिस की मौत के बाद और बाघ यहां लाने के लिए जू अथॉरिटी ऑफ इंडिया के पास प्रपोजल भेजा जाएगा।
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2010 में ली थी कर्मचारी की जान

चिड़ियाघर में आने के बाद बाघ ‘ब्रांडिस’ 2010 में कर्मचारी महाबीर की जान लेने के बाद चर्चा में आया था। ब्रांडिस ने उसे खाना देने गए कर्मचारी महाबीर को हाथ पर झपट्टा मारकर पिंजरे में खींच लिया था। महाबीर की पिंजरे में ही मौत हो गई थी।

ब्रांडिस के आने पर चिड़ियाघर में बाघों की संख्या चार हो गई थी। इनमें दो नर और दो मादा थे। नर के साथ लड़ाई में दोनों मादाओं की मौत हो गई दूसरे नर को जू अथॉरिटी ने पंजाब के एक चिड़ियाघर में भेज दिया। वर्ष 2012 के बाद से ब्रांडिस चिड़ियाघर में अकेला ही रह रहा था।

अनेक लोग ब्रांडिस की दहाड़ सुनने के लिए ही चिड़ियाघर आते थे। उसकी दहाड़ न केवल चिड़ियाघर में बल्कि साथ लगते पार्क और कोर्ट के गेट तक सुनाई देती थी। चिड़ियाघर कर्मचारियों के अनुसार अनेक लोग उसकी दहाड़ सुनकर अंदाजा लगाते थे कि ब्रांडिस घूमने खुली जगह में आया हुआ है और उसे देखने आते थे।
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