कुलपति डॉ. एच. के अग्रवाल ने इस पूरे घटनाक्रम को भावुक शब्दों में साझा करते हुए कहा कि यह हरियाणा के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि युवा का लिवर इंस्टीट्यूट ऑफ लीवर और बिलियरी साइंसेज नई दिल्ली भेजा गया, जहां उससे दो मरीजों को नई जिंदगी मिलेगी। इसके अलावा एक किडनी पीजीआई रोहतक में ही एक जरूरतमंद मरीज को दी गई, जबकि दूसरी किडनी आर्मी के कमांड हॉस्पिटल चंडीमंदिर को भेजी गई।
डॉ. अग्रवाल ने कहा कि इस प्रक्रिया का सबसे विशेष और प्रेरणादायक पहलू यह रहा कि चंडीमंदिर स्थित आर्मी कमांड अस्पताल से डॉक्टरों की टीम हेलीकॉप्टर से बाबा मस्तनाथ हेलिपैड पहुंची। वहां से अंग को एयरलिफ्ट कर तुरंत कमांड अस्पताल लाया गया। डॉ. एच के अग्रवाल ने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया ने यह साबित कर दिया कि यदि इच्छाशक्ति और समन्वय हो, तो चिकित्सा क्षेत्र में चमत्कार संभव हैं।
डॉ. अग्रवाल ने बताया कि दोनों कॉर्निया भी पीजीआई रोहतक को आवंटित किए गए, जिससे दो नेत्रहीन व्यक्तियों को दृष्टि मिलने की संभावना बनी। इस प्रकार एक 16 वर्षीय किशरो ने अपने जाने के बाद भी 6 घरों में रोशनी और खुशियां भर दीं। यह केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि उन परिवारों की कहानी है जो अब फिर से जीवन को मुस्कान के साथ जी सकेंगे।