राजनीति से दूर-दूर तक रिश्ता न रखने वाले सुरेंद्र सिंह ने अपने पहले ही चुनाव में दिल्ली कैंट से आम आदमी पार्टी के टिकट पर शानदार जीत हासिल की।
एनएसजी के पूर्व कमांडो सुरेंद्र सिंह की जीत पर उनके गांव छारा में जमकर जश्न मनाया गया। सुरेंद्र सिंह ने दिल्ली कैंट से बीजेपी के करण सिंह तंवर को मात दी।
झज्जर के छारा गांव के एक साधारण परिवार में जन्मे सुरेंद्र सिंह ने कारगिल युद्ध में भी हिस्सा लिया था। सुरेंद्र सिंह ने 14 वर्ष तक आर्मी में देश की सेवा की है। इस कार्यकाल में सुरेंद्र ने कारगिल के अलावा ऑपरेशन पराक्रम, सद्भावना और आपरेशन ब्लैक थंडर में भी हिस्सा लिया।
पांच साल पहले 26/11 के हमले के दौरान हेलीकॉप्टर से उतारे गए एनएसजी कमांडो में सुरेंद्र सिंह भी शामिल था। इस आपरेशन में सुरेंद्र ने अपनी श्रवण शक्ति खो दी थी। इसके बाद उन्हें आर्मी से अनफिट घोषित कर उनकी सेवा समाप्त कर दी गई।
आर्मी से रिटायर होने के बाद जब उन्हें उनके हक, पेंशन व अन्य सुविधाएं नहीं मिली तो उन्होंने करीब एक साल पहले अक्तूबर 2012 में दिल्ली में एक प्रेस कांफ्रेंस कर अपना हक मांगा। इसके बाद सुरेंद्र सिंह सुर्खियों में आ गए। अक्तूबर में ही अरविंद केजरीवाल ने सुरेंद्र सिंह को दिल्ली कैंट से चुनाव लड़ने का न्योता दिया था।
तब सुरेंद्र ने चुनाव लड़ने के बारे में न तो सोचा था और न ही उनका राजनीति या राजनीतिज्ञों से कोई नाता था। इस समय में वे झज्जर के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में चलाई जा रही एनवीईक्यूएफ स्कीम के तहत सिक्योरिटी के शिक्षक के तौर पर काम कर रहे थे।
वोकेशनल स्कीम के तहत कराई जाने वाली पढ़ाई में विद्यार्थियों को वे सुरक्षा का पाठ पढ़ाते थे। केजरीवाल के निमंत्रण के बारे में उन्होंने साथियों से चर्चा की तो उनके साथियों ने ही उन्हें चुनाव मैदान में उतरने को कहा था। जिसके बाद वे लगातार अरविंद के संपर्क में बने रहे।
नवंबर 2012 में उन्होंने आम आदमी पार्टी ज्वाइन की। इसके बाद वे झज्जर जिले के संयोजक बने और झज्जर, बहादुुरगढ़ में लगातार कार्यक्रम करते रहे।
दिल्ली कैंट में चुनाव मैदान में उतरने के बाद सुरेंद्र सिंह ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वे लगातार वहां सक्रिय रहे और उनकी सक्रियता कैंट से उनकी जीत के साथ एक मुकाम तक पहुंची। सुरेंद्र सिंह के जीत से ग्रामीण और उनके साथी काफी प्रसन्न हैं।