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यहां अंधेरे में सूख रहे लोगों के कंठ

Thu, 23 Jan 2014 11:43 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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हरियाणा सरकार के कर्मचारियों की 72 घंटे की हड़ताल वीरवार शाम को समाप्त हो गई। वीरवार को हड़ताल से प्रदेश में बिजली और पानी सप्लाई सबसे ज्यादा प्रभावित रही। प्रदेश में 85 फीसदी क्षेत्र ब्लैक आउट रहा।
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बिजली न होने से पानी सप्लाई भी ठप रही। गुस्साएं लोगों ने जींद-रोहतक मार्ग पर जाम लगाया। सिवानी में पुलिस ने हड़ताली कर्मचारियों पर पुलिस लाठीचार्ज किया। उधर, सरकार ने कर्मचारी तालमेल समिति को बातचीत के लिए शुक्रवार को चंडीगढ़ बुलाया है।

तालमेल समिति के चार नेताओं राज सिंह दहिया, धर्मबीर फौगाट, अमर सिंह यादव और सुभाष लांबा के साथ रोहतक के विधायक बीबी बत्तरा ने शुक्रवार दोपहर में हड़ताल समाप्त करने का आग्रह किया। बत्तरा ने उन्हें जानकारी दी कि सरकार उनसे बातचीत करना चाहती है।
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हड़ताल से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो रहा है। बत्तरा ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से फोन पर बातचीत की। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव से बात की और कर्मचारी नेताओं के साथ बैठक करने को कहा। उधर,  कर्मचारी नेताओं ने बत्तरा से कहा कि  सरकार लिखित में बातचीत का पत्र जारी करेगी तो वे हड़ताल को नहीं बढ़ाएंगे।

उधर मुख्य सचिव एससी चौधरी ने सुभाष लांबा से बात की और उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक बातचीत का भरोसा दिया। मुख्य सचिव कार्यालय से शाम को रोहतक उपायुक्त कार्यालय 24 जनवरी की बैठक का पत्र भेजा गया। इस पत्र को बत्तरा ने तालमेल समिति सदस्यों को दिया।

लांबा ने बताया कि मुख्य सचिव के साथ शुक्रवार को बातचीत की जाएगी। अगर कर्मचारियों की मांगों को मान लिया गया तो ठीक है। अन्यथा कर्मचारी फिर हड़ताल पर जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार अगर पहले बातचीत कर लेती तो हड़ताल की नौबत न आती।

जब लोग परेशान हो गए, बिजली, पानी के कारण हाहाकार मच गई तब सरकार ने बातचीत के लिए बुलाया है। वैसे भी वीरवार को कर्मचारी तालमेल समिति की 72 घंटे की हड़ताल समाप्त होनी थी। उन्होंने कहा कि जनता को हुई तकलीफ का उन्हें भी खेद है। मगर शुक्रवार की बातचीत के सकारात्मक परिणाम की उन्हें उम्मीद है।

कर्मचारियों की कुछ मांगें नहीं मानी जा सकती
मुख्य सचिव एससी चौधरी ने वीरवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि कर्मचारियों की कुछ मांगें ऐसी हैं जो मानी नहीं जा सकती। उन्होंने कहा कि संविधान की धारा 311 (2) समाप्त करने की मांग इसलिए नहीं मानी जा सकती क्योंकि वह संविधान संशोधन की बात है।


राज्य सरकार उसमें कुछ नहीं कर सकती। कर्मचारियों की मांग है कि  यह धारा समाप्त की जाए क्योंकि इस धारा के साथ किसी भी कर्मचारी को सीधे नौकरी से निकालने का प्रावधान है। मुख्य सचिव ने कहा कि वे बातचीत के लिए तैयार हैं।

बिजली पर असर, पानी पर नहीं : सीएम
मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हड़ताल से कुछ क्षेत्रों में बिजली सप्लाई पर असर पड़ा है मगर पानी पर नहीं। पानी के लिए जेनरेटर सेट लगाए गए थे।


इनेलो ने दिया समर्थन
इनेलो नेता रामपाल माजरा ने कहा कि वे कर्मचारियों की मांगों का समर्थन करते हैं। हड़ताल से जनजीवन प्रभावित रहा मगर सरकार ने कोई आपात योजना नहीं बनाई। उनकी जायज मांगें मानी जानी चाहिए।
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