दक्षिण हरियाणा के बिजली उपभोक्ताओं के लिए अब सुचारु आपूर्ति बाधित हो सकती है। दक्षिण हरियाणा निगम में पहले से ही भिवानी सबसे ज्यादा डिफाल्टर उपभोक्ताओं वाला क्षेत्र है।
उसपर अब उसमें उत्तर हरियाणा निगम के सबसे ज्यादा डिफाल्टर उपभोक्ताओं वाले जींद को भी शामिल कर लिया गया है। ऐसे में दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम की सांसें फूलना स्वाभाविक है क्योंकि निगम पर पहले ही 14874 करोड़ रुपये की देनदारी है।
भिवानी दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम में शामिल है। इसका लाइन लॉस सबसे ज्यादा 44.04 प्रतिशत है। इसी प्रकार फरीदाबाद का 10.74, गुड़गांव का 14.02, नारनौल का 36.50, रेवाड़ी का 20.83, हिसार का 33.54 और सिरसा का 15.82 प्रतिशत है।
इसकी भरपाई गुड़गांव और फरीदाबाद के औद्योगिक क्षेत्र से होती रही है। इससे बिजली वितरण में कोई परेशानी नहीं होती थी लेकिन उत्तरी हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम के सबसे अधिक लाइन लॉस वाले जिले जींद को भी दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम में शामिल कर दिया गया है।
इससे इस निगम का लाइन लॉस कम होने की बजाय और बढ़ जाएगा। उत्तरी हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम के तहत आने वाले जिलों के लाइन लॉस की बात करें तो जिला जींद का लाइन लॉस 52 प्रतिशत है। इसके शामिल होने से दक्षिण हरियाणा पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ेगा जबकि निगम पर पहले से ही 14874 करोड़ रुपये की देनदारी है।
इस समस्या से निपटने के लिए निगम को अब और अधिक पसीना बहाना होगा। साथ ही लाइन लॉस को कम करने के लिए नए सिरे से योजना बनानी होगी।
वीके चौधरी, परिचालन निदेशक जींद को दक्षिण हरियाणा में शामिल करने से फर्क नहीं पड़ेगा। निगम ने वन टाइम सेटलमेंट स्कीम लागू की है। इससे डिफाल्टिंग अमाउंट कम हो जाएगी और डिफाल्टरों की संख्या घटेगी।