यूक्रेन में बिगड़ते हालातों के बीच जिले के चार विद्यार्थी अपने वतन लौटे हैं। अपने बच्चों को सकुशल देख परिजनों के चेहरे खिल उठे। यूक्रेन से लौटने वाले जिले के विद्यार्थियों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है। वहां अभी भी 70 से अधिक विद्यार्थी फंसे हुए हैं। इस बीच रूस द्वारा खारकीव से सभी विद्यार्थियों को जल्द निकालने की एडवाइजरी जारी करने के बाद परिजनों की चिंता और अधिक बढ़ गई है। खासकर खारकीव में फंसे विद्यार्थियों के परिजन सरकार से उनके बच्चों को जल्द सुरक्षित निकालने का प्रबंध करने की मांग कर रहे हैं।
इस बीच यूक्रेन से विद्यार्थियों की सकुशल वापसी को लेकर केंद्र सरकार व राज्य सरकार ने प्रयास तेज कर दिए हैं। अधिकारी यूक्रेन में फंसे विद्यार्थियों के परिजनों से लगातार संपर्क कर रहे हैं। घर लौटने वाले चारों विद्यार्थी खरखौदा के निवासी हैं। इनमें सिद्धार्थ, सागर वधवा, सौरभ सैनी व मेघा शामिल हैं।
28 घंटे रोमानिया बॉर्डर पर फंसे रहने के बाद वतन लौटा सिद्धार्थ
बुधवार को यूक्रेन से घर लौटे खरखौदा निवासी सिद्धार्थ ने बताया कि वतन वापसी के लिए उसे भारी संघर्ष करना पड़ा। भारतीय दूतावास से संपर्क करने के बावजूद भी किसी प्रकार की सहायता नहीं मिली तो वह खुद ही अपने साथियों के साथ बस किराये पर लेकर रोमानिया बॉर्डर के लिए रवाना हुए थे। बस चालक ने बॉर्डर से करीब 12 किलोमीटर पहले उतार दिया था। वहां से पैदल सफर कर 28 फरवरी को रोमानिया पहुंचे थे, लेकिन उन्हें प्रवेश नहीं दिया। 28 घंटे तक खुले आसमान के नीचे बर्फबारी में माइनस तापमान मेें भूखे-प्यासे खड़े रहे। बाद में रोमानिया बॉॅर्डर पार किया और हवाई अड्डे ले जाने के लिए एक बस में बैठा दिया। बस चालक उन्हें हवाई अड्डे ले जाने के बजाय बुखारेस्ट से 6 घंटे दूर ले गया। वहां भी दूतावास से किसी प्रकार की सहायता नहीं मिली। मुश्किल से बुखारेस्ट पहुंचे और वहां से टिकट बुक करवाकर बुधवार को घर पहुंचा हूं।
सिद्धार्थ ने कहा कि कभी नहीं सोचा था कि ऐसे दिन भी देखने पड़ेंगे। उन्होंने सरकार से मांग की है कि सभी बॉर्डरों पर भारतीय सरकार के नुमांइदे खड़े किए जाएं, ताकि भारतीय विद्यार्थियों को वतन वापसी के लिए किसी प्रकार की परेशानी न झेलनी पड़े। सभी विद्यार्थियों की जल्द वतन वापसी करवाई जाए।
सरकार कर रही बेहतर काम, दूतावास के कर्मी बरत रहे लापरवाही
मुश्किलों के बीच घर लौटे सिद्धार्थ के पिता डॉ. राजबीर सैनी ने बताया कि सरकार बेहतर काम कर रही है, लेकिन भारतीय दूतावास के अधिकारी और कर्मचारी लापरवाही बरत रहे हैं। यही नहीं वह सरकार को अंधेरे में रख रहे हैं। यही कारण है कि यूक्रेन में फंसे भारतीय को समय पर सहायता नहीं मिल पा रही। सिद्धार्थ को वापस लाने में भाजपा नेता राजीव जैन, ललित बत्रा के साथ ही पदम सिंह दहिया, पवन खरखौदा, प्रीतम खोखर ने पूरा सहयोग किया। एसडीएम खरखौदा संजय बिश्नोई ने भी हर कदम पर साथ दिया और सिद्धार्थ को वापस लाने के लिए लगातार संपर्क में रहे।
विद्यार्थियों की भीड़ देख पीटना शुरू कर देते हैं यूक्रेनी सैनिक
खरखौदा के गांव बरोणा निवासी मेघा पुत्री धर्मेंद्र दहिया ने बताया कि यूक्रेन में बहुत बुरी स्थिति है। मैं यूक्रेन के टर्नोपिल शहर में थी। युद्ध के बाद से अब तक का समय खतरे में बीता है। हर समय जान पर खतरा मंडरा रहा था। अलग-अलग स्थानों से विद्यार्थियों की भीड़ यूक्रेन-रोमानिया के बॉर्डर पर पहुंचती है तो यू्क्रेनी सैनिक उन्हें पीटना शुरू कर देते हैं। इससे विद्यार्थियों में दहशत में है। खास बात यह है कि वहां पर सबसे पहले लड़कियों को निकालने का प्रयास किया जाता है। अभी भी वहां काफी संख्या में विद्यार्थी फंसे हुए हैं। मेघा ने कहा कि मैं कई दिनों तक भूखी रही और सो भी नहीं पाई। अब अपने घर पहुंचकर अपने अभिभावकों से मिलकर राहत मिली है और पूरा परिवार खुश है।
सरकार ने सहयोग से घर पहुंचना हुआ मुमकिन
यूक्रेन से लौटे खरखौदा निवासी सागर वधवा व सौरभ सैनी का कहना है कि रूस द्वारा यूक्रेन पर हमला करने के बाद से वहां के हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। विद्यार्थी बंकरों में फंसे हुए हैं। हम उजोरोद यूनिवर्सिटी में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे थे। रूस के यूक्रेन पर हमला करने की सूचना के बाद से लौटने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन फ्लाइट रद्द हो गई थी। भारतीय दूतावास के निर्देशानुसार हमें हंगरी बॉर्डर ले जाया गया। वहां से अपने देश में वापसी हुई। यूक्रेन मेें अलग-अलग हिस्सों में अभी भी कई विद्यार्थी फंसे हुए हैं।
जिला व उपमंडल स्तर पर बनाई कमेटियां : उपायुक्त
उपायुक्त ललित सिवाच ने बताया कि यूक्रेन में फंसे भारतीय विद्यार्थियों की सुरक्षित वापसी को लेकर जिला व उपमंडल स्तर पर कमेटियां बनाई गई हैं। दोनों कमेटियों के अधिकारी लगातार विद्यार्थियों के परिजनों के संपर्क में है। विद्यार्थियों की वापसी को लेकर जो भी सूचना प्रशासन के पास आती है तो उन्हें तुरंत परिजनों तक पहुंचाया जाता हैं। यूक्रेन में गए जिले के विद्यार्थियों का डाटा तैयार किया जा रहा है। उपायुक्त ने विद्यार्थियों के परिजनों से अपील करते हुए कहा कि यूक्रेन में फंसे भारतीयों की सुरक्षा को लेकर किसी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न दें। प्रदेश सरकार राज्य के निवासियों की सुरक्षित वापसी के लिए निरंतर केंद्र सरकार से समन्वय बनाए हुए है। जिला स्तरीय कमेटी में जिला परिवहन अधिकारी, नगराधीश, तहसीलदार सोनीपत व उपमंडल स्तर पर बनाई गई कमेटी में संबंधित उपमंडल अधिकारी, संबंधित उपमंडल के तहसीलदार व बीडीपीओ को शामिल किया गया है।
यूक्रेन से लौटे सागर वधवा को मिठाई खिलाता परिजन। संवाद- फोटो : Sonipat