फर्जी कागजात तैयार कराकर जमानत कराने, झूठी गवाही देने और न्यायालय में आरोपियों की झूठी पहचान करने वाले गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुरुचि अतरेजा सिंह के आदेश पर मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपियों का एक साथी अभी पुलिस पकड़ से बाहर है। उन्होंने बिहार के एक व्यक्ति की रुपये लेकर जमानत कराई थी और न्यायालय में झूठी गवाही देकर उसकी पहचान होने का दावा किया था।
न्यायालय में पॉस्को एक्ट के एक मुकदमे की सुनवाई चल रही है। उसमें पुलिस ने दशरथ नाम के व्यक्ति को न्यायालय में पेश किया था। दशरथ ने खुद को सोनीपत का रहने वाला बताया था। उसके पक्ष में जरूरी दस्तावेज न्यायालय को उपलब्ध कराए गए थे। दशरथ की विधिवत न्यायालय से जमानत ली गई। जमानत के बाद वह फरार हो गया। उसको भगौड़ा घोषित करने के साथ ही पुलिस ने तलाश शुरू की। उसके द्वारा न्यायालय में दिया गया पता सही नहीं पाया गया। पुलिस जांच में सामने आया कि वह बिहार का रहने वाला था। उसका बिहार का सही पता भी पुलिस उपलब्ध नहीं कर पाई। जिस पर पुलिस ने न्यायालय ने उसकी व उसके नाम-पते की पहचान करने वाले और उसकी जमानत लेने वालों को समन जारी किए, लेकिन वह भी न्यायालय में हाजिर नहीं हुए। उनके द्वारा दिया गया पता भी पुलिस को सही नहीं मिला। उसके बाद आरोपियों के खिलाफ वारंट जारी किए गए। उसके बाद पुलिस ने उनमें से दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। उनको न्यायालय में पेश किया गया। उनके अन्य साथी अभी फरार हैं। पुलिस उनको तलाश कर रही है। पुलिस ने मामले में सतबीर और उसके साथी पालेराम को गिरफ्तार कर लिया है। इनमें से सतबीर ने आरोपी दशरथ की जमानत दी थी और पालेराम ने दशरथ और सतबीर की पहचान की थी। वह नंबरदार है। इसके लिए फर्जी कागजात तैयार कराए गए थे। मामले में एक साथी फरार है और अन्य की संलिप्तता का पता लगाया जा रहा है।
आरोपी साजिश में शामिल रहे हैं। उन्होंने कार्रवाई से बचने के लिए भी साजिश रची। दोनों गिरफ्तार आरोपी फर्जीबाड़ा कर जमानत कराने वाले गिरोह के सदस्य हैं। न्यायालय के आदेश पर मुकदमा दर्ज कर दो आरोपियों गिरफ्तार कर लिया है। मामले में गहनता से जांच की जा रही है। -इंस्पेक्टर सवित कुमार, थाना प्रभारी, सिटी सोनीपत