गुमड़ के खिलाड़ियों ने गांव को अलग ही पहचान दी है। गांव के खिलाड़ियों ने देश-प्रदेश ही नहीं विदेश तक गांव का नाम रोशन किया है। इसके बावजूद गांव में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। गांव में खिलाड़ियों के लिए न स्टेडियम है और न ही अन्य उत्कृष्ट सुविधाएं। पंचायत चुनाव में प्रतिनिधि बदलते रहे पर इस गांव के हालात नहीं बदले। कुछ सुविधा मिली भी तो डेढ़ साल से अधिक समय से अब पंचायत प्रतिनिधि नहीं होने से फिर से हालात बिगड़ गए। ग्रामीणों को अब गांव की बनने वाली नई सरकार से आस है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस बार पंचायत चुनाव में वह अपना मत केवल उस उम्मीदवार को देंगे, जो गांव का विकास करेगा और सुविधाएं बढ़ाएगा। ईमानदार छवि वाले को ही अपना प्रतिनिधि चुनकर गांव की सरकार बनाएंगे। उन्होंने बताया कि पंचायत चुनाव की तारीखों की घोषणा का लंबे समय से इंतजार कर रहे थे, ताकि अटके विकास कार्यों को गति मिल सके। वर्तमान समय में गांव में सफाई व्यवस्था चरमराई हुई है। जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। उनका आरोप है कि गांव में एक भी सफाई कर्मचारी नहीं है। जिस कारण साफ-सफाई नहीं होती। गांव में बनाए गए पार्कों की हालत दयनीय है। पार्क में गोबर व कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। पार्कों में ग्रामीण अपने पशु बांध रहे हैं। कई बार अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं है। गांव में दूषित पानी की निकासी के प्रबंध नहीं है। जिससे बारिश के समय गांव में तालाब जैसे हालात बन जाते हैं। ऐसे हालातों को सुधारने की तरफ किसी का ध्यान नहीं है।
ग्रामीण कृष्ण, विकास, कुलदीप, तारा चंद ने बताया कि गांव में दूषित पानी के निकासी की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। गांव का मुख्य नाला गंदगी से अटा होने के कारण जाम रहता है। जिससे दूषित पानी ड्रेन में न जाकर वापस गली में भर जाता है। गांव में बैठने के लिए लगाए गए बेंच भी टूटे हुए हैं। जिससे बुजुर्गों को काफी परेशानी हो रही है। लोगों का कहना है कि गांव में लगी स्ट्रीट लाइट खराब पड़ी हुई है। इस बारे में प्रशासन के साथ निवर्तमान सरपंच को भी शिकायत दी, पर किसी ने सुध नहीं ली। अब गांव की नई सरकार से आस है।
खिलाड़ियों के लिए नहीं कोई सुविधा
गांव ने देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी दिए हैं, जिन्होंने गांव का नाम रोशन किया है। गांव के पहलवान रामबीर ने एशियाई खेलों में देश का प्रतिनिधित्व किया था। उनके साथ ही गांव से राष्ट्रीय स्तर के कबड्डी खिलाड़ी रविंद्र पहल और मोहित ने भी प्रदेश व गांव का नाम चमकाया। वहीं राज्य स्तर के कई खिलाड़ी भी गांव से निकले हैं। फिर भी गांव में खिलाड़ियों के लिए कोई सुविधा नहीं है। गांव में एक स्टेडियम हैं, उसमें भी सुविधाओं का अभाव है। जिस कारण गांव के खिलाड़ी निजी खेल संस्थानों में जाने को मजबूर हैं। जनप्रतिनिधियों से खिलाड़ियों को जो उम्मीदे थी वह आज भी वैसे ही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस बार जो गांव के विकास के लिए काम करेगा, उसको वोट दिया जाएगा।
गांव पर एक नजर
गांव की आबादी : 7000
मतदाता : 3500
गांव का मुख्य व्यवसाय खेतीबाड़ी
मुख्य समस्या : दूषित पानी की निकासी, गांव में सफाई न होना और खिलाड़ियों के लिए सुविधाओं का अभाव
बोले ग्रामीण
गांव में पंचायती जमीन पर पार्क बनाए गए थे, लेकिन सरपंच का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन पार्कों के हालात बदतर हो चुके हैं। पार्कों में दूषित पानी भरा रहता है। जिससे यहां सैर को आने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। जो इन समस्याओं का निराकरण करेगा, उसी को अपना प्रतिनिधि चुनेंगे। -इंद्र सिंह
गांव में दूषित पानी की निकासी के लिए बने मुख्य नाले की सफाई न होने से नाला गंदगी से अटा रहता है। दूषित पानी आगे न जाकर वापस गली में जमा हो जाता है। जिससे बीमारियां फैलने का खतरा बना रहता है। जो इस समस्या का समाधान करवाने का वादा करेगा, उसी को अपना प्रतिनिधि चुनेंगे। -दयानंद
गांव में बैठने के लिए लगाए गए बेंच टूट गए हैं। पूरे गांव में एक भी स्ट्रीट लाइट नहीं है। रात के समय अंधेरे में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। गांव में व्याप्त इस समस्याओं को दूर करने वाले और सुविधाएं बढ़ाने वाले उम्मीदवार को भी मत देकर विजयी बनाएंगे। -शेर सिंह
पंचायत चुनाव का डेढ़ साल से इंतजार कर रहे थे, ताकि गांव में लंबे समय से अटके विकास कार्यों को गति मिल सके। पंचायत चुनाव न होने से गांव में पार्कों की स्थिति बदतर हो चुकी है। गलियों में गंदगी है, बेंच टूटे पड़े हैं, स्ट्रीट लाइटें खराब हैं। गांव के विकास के लिए बेहतर उम्मीदवार को अपना प्रतिनिधि चुनेंगे। -रामकुमार
मैंने अपने कार्यकाल में करोड़ों रुपये के कार्य करवाए हैं। कार्यकाल समाप्त होने के बाद गांव की सफाई व्यवस्था चरमरा गई है। पांच साल में गांव के लिए जो कार्य किए हैं, ये उनके लिए इम्तिहान है। पिछली बार जो कमियां रह गई थीं, उन्हें इस बार दूर किया जाएगा। भाईचारे को साथ लेकर विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ेंगे। -रविंद्र पहल, निवर्तमान सरपंच, गांव गुमड़।