सोनीपत। कृषि कानूनों को रद्द कराने की मांग को लेकर कुंडली बॉर्डर पर धरना दे रहे पंजाब के किसान करीब एक साल से आंदोलन चला रहे हैं। वहीं करीब 10 माह से किसान दिल्ली की सीमाओं पर मौजूद हैं। इससे दो माह पहले वह पंजाब में आंदोलन कर रहे थे। पंजाब में आंदोलन के दौरान रेलवे ट्रैक भी बंद किए थे। दो माह तक जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो किसानों ने दिल्ली की ओर कूच किया था।
अब किसान सालभर से घरों से बाहर अपने हकों के लिए लड़ रहे किसानों ने सर्दी, गर्मी, बारिश, धूप, आंधी का सामना किया है। अब हालात यह है कि कुंडली बॉर्डर के साथ-साथ गाजीपुर व टीकरी बॉर्डर पर किसानों ने धरनास्थलों पर ही अपने आशियाने बना लिए हैं। कई जगह किसानों ने पक्के निर्माण भी कर लिए हैं। पानी से लेकर बिजली तक के लिए किसानों को लड़ना पड़ा है। यहां तक कि ज्यादातर किसानों के परिजनों में शामिल महिलाएं, बच्चे भी उनके साथ बॉर्डर पर मौजूद हैं। पंजाब के किसानों की सबसे ज्यादा संख्या कुंडली बार्डर पर है।
किसान बोले- पूरे देश में फैल चुका है आंदोलन
किसान लगातार आंदोलन कर रहे हैं। यह आंदोलन पूरे देश में फैल चुका है। अब किसान 27 सितंबर को होने वाले भारत बंद को सफल बनाने के प्रयास में जुटे हैं। किसान अपनी संसद तक दिल्ली में चला चुके हैं। सरकार को जल्द किसानों के सामने झुकना होगा। इस आंदोलन में 600 से ज्यादा किसान शहीद हो चुके हैं।
- दर्शन सिंह, पंजाब
दो महीने पंजाब में और 10 माह से यहां बैठे हैं। शुरुआत में कुछ दिक्कते आई थी, लेकिन अब ज्यादा परेशानी नहीं हैं। धरनास्थल पर बिजली-पानी व खाने का इंतजाम कर चुके हैं। हमारे संघर्ष में स्थानीय लोगों का खूब साथ मिल रहा है। हम चाहते हैं कि सरकार हमारी बात सुनें और उनकी मांगों को मानकर हमें घर वापस भेजे।
- जकसीर सिंह, गांव जीता, बठिंडा, पंजाब
जत्थेबंदियों की कॉल के बाद 26 नवंबर, 2020 से यहां धरने पर बैठे हैं। हमारी मांग है कि सरकार किसानों की सुनवाई कर सभी जायज मांगों को पूरा करें। घर का काम खूब किया। खेत में भी काम किया। अब अगली पीढ़ी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। भतीजा अप्रैल में यहां शहीद हो गया था। आंदोलन के लिए हर कुर्बानी देने को तैयार हैं। सरकार किसानों की जमीन छीनना चाहती है। सरकार के मंसूबों को कभी पूरा नहीं होने दिया जाएगा।
- मेवा सिंह, गांव दुग्गा संगरूर, पंजाब
हम सितंबर, 2020 से ही आंदोलन में भाग ले रहे हैं। बीच-बीच में घर जाते हैं और परिजनों का हालचाल जानकर फिर वापस आ जाते हैं। अब तो ऐसा लगता है कि हम यहीं के वाशिंदे हैं। स्थानीय लोग खूब मदद कर रहे हैं। सरकार को किसानों की मांग मान लेनी चाहिए।
- गुरप्रीत शर्मा, बठिंडा, पंजाब