टोक्यो पैरालंपिक में खेवड़ा के सुमित आंतिल ने जख्म को बाधा नहीं बनने दिया और शानदार अंदाज में बेहतर प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीता। सुमित ने दुनिया को दिखा दिया कि हौसले अगर बुलंद हों तो दिव्यांगता भी बाधा नहीं बन सकती।
सुमित के टोक्यो में गोल्डन भाला फेंकते ही खेवड़ा में ग्रामीण खुशी से झूम उठे। सुमित की मां निर्मला की आंखें बेटे की उपलब्धि पर छलक आईं, लेकिन दूसरे ही पल वह परिवार की अन्य महिलाओं के साथ खुशी से नाचने लगीं।
सुमित के स्वर्ण पदक जीतने की सूचना पर पूरे गांव के ग्रामीण उसके घर के बाहर एकत्रित हो गए और परिजनों को बधाई देने लगे। इस दौरान देशभक्ति के नारे लगाए गए। ग्रामीणों ने कहा कि सुमित के लौटने पर गांव में जश्न मनाया जाएगा। इसके लिए अभी से तैयारियां शुरू कर दी जाएंगी। सुमित के परिजनों ने बताया कि उन्हें पूरा विश्वास था कि सुमित स्वर्ण पदक जीतेगा।
बोले ग्रामीण
एक लाख रुपये से करेंगे सम्मानित
सुमित के स्वर्ण पदक जीतने की बहुत ज्यादा खुशी है। सुमित ने गांव का नाम पूरे विश्व में रोशन कर दिया। देवऋषि स्कूल की तरफ से सुमित को एक लाख रुपये से सम्मानित किया जाएगा।
- मास्टर जयसिंह, सुमित का चाचा।
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यहां तक पहुंचने के लिए की कड़ी मेहनत
सुमित ने देश व पूरे गांव का नाम रोशन कर दिया। इसके लिए उसने बहुत मेहनत की है। सुमित ने जो हासिल किया, वह बहुत बड़ी उपलब्धि है। गांव पहुंचने पर सुमित का पूरा गांव मिलकर स्वागत करेगा।
- राजकुमार, पैरा एथलीट, खेवड़ा
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लाडले ने दिया झूमने का अवसर
सुमित के स्वर्ण पदक जीतने की खुशी इतनी अधिक है, जिसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। सुमित ने आज हम सबको झूमने का अवसर दिया है।
- सीमा, सुमित की चाची
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गांव के 850 साल के इतिहास में आया पहला गोल्ड
850 साल पहले बसा था हमारा गांव। यहां विभिन्न खेलों के अनेक खिलाड़ी हैं, लेकिन स्वर्ण पदक पहली बार आया है। 36 बिरादरी में खुशी का माहौल है। सुमित के गांव पहुंचने पर पूरा गांव एकजुट होकर स्वागत करेगा।
- दलबीर, खेवड़ा
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लाडले ने दिया जन्माष्टमी का तोहफा
पैरालंपिक में जाते समय सुमित के पैर में घाव था, उसके बावजूद सुमित ने बेहतरीन खेल दिखाते हुए रिकॉर्ड कायम कर स्वर्ण पदक जीता है। जन्माष्टमी पर्व पर जो तोहफा दिया है, उससे पूरा गांव बेहद खुश है।
- डॉ. मोनू, खेवड़ा