सोनीपत। श्री रामलीला सभा की ओर से कामी रोड स्थित रामलीला मैदान में छठे दिन दशरथ-कैकेयी संवाद, श्रीराम वन गमन, केवट प्रसंग, दशरथ देह त्याग की लीला का मंचन किया गया। वृंदावन से आचार्य सौरभ द्विवेदी के निर्देशन में कलाकारों ने सभी पात्रों का किरदार बखूबी निभाया। शहरभर से श्रद्धालु रामलीला मंचन देखने के लिए पहुंचे।
इससे पूर्व धर्मशाला नियामत राय केदारनाथ सोसाइटी के पदाधिकारियों ने श्रीराम चरित मानस का पूजन कर रामलीला मंचन की शुरुआत की। मुख्यातिथि के रूप में सामाजिक कार्यकर्ता देवेंद्र कुच्छल, पंडित अमित शौनक व मुकेश माथुर ने शिरकत की। कार्यक्रम की अध्यक्षता भाजपा नेता योगेश पाल अरोड़ा ने की। कलाकारों ने मंचन से दर्शाया कि महाराजा दशरथ बड़े पुत्र श्रीराम को अयोध्या का राजा बनाने की घोषणा करते हैं। राम के राजतिलक की सूचना सुनते ही मंथरा महारानी कैकेयी को भड़काती है। कैकेयी महाराजा दशरथ से उनको दिए दो वचन मांगती हैं। वह पहले वचन में अपने पुत्र भरत को अयोध्या का राज और दूसरे वचन में राम को 14 वर्ष का वनवास दिए जाने की बात कहती हैं।
प्रभु श्रीराम, सीता और लक्ष्मण के साथ माता-पिता की आज्ञा लेकर वन को प्रस्थान करते हैं। तभी महाराज दशरथ को श्रवण के माता-पिता से मिला श्राप याद आ जाता है। वह पुत्र वियोग में अपने प्राण त्याग देते हैं। यह दृश्य देख दर्शकों की आंखों से अश्रु धारा बहने लगी। कार्यक्रम में महेंद्र मंगला, राजकुमार गोयल, अमित कुच्छल, गजेंद्र मंगला, महेंद्र वर्मा, प्रवीण गोयल, अनिल जैन, रणबीर खत्री, बीएम कुच्छल, वीरेंद्र कटारिया व तरुण शर्मा मौजूद रहे।
लक्ष्मण ने रावण की बहन शूर्पणखा की नासिका को किया भंग
सोनीपत। सेक्टर-12 में श्री रामायण ट्रस्ट की ओर से चल रहे रामलीला मंचन के सातवें दिन भरत मिलन और शूर्पणखा नासिका भंग के प्रसंग का मंचन किया गया। मंचन की शुरुआत श्री रामायण ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने दीप प्रज्वलन व पूजा-अर्चना के साथ की। कलाकारों ने दर्शाया कि भरत प्रभु श्रीराम को समय से पूर्व अयोध्या जाने से मना कर देते हैं तो भरत श्रीराम की खड़ाऊ को राज प्रतिनिधि के रूप में अयोध्या ले आते हैं। वह भगवान श्रीराम की खड़ाऊ का राजतिलक कर प्रण लेते हैं कि जब तक श्रीराम अयोध्या वापस नहीं आते, तब तक वह वनवासी जीवन व्यतीत करेंगे। रावण की बहन शूर्पणखा एक दिन प्रभु श्रीराम की कुटिया में पहुंचती है। श्रीराम की सुंदरता पर मोहित होकर वह सुंदर रूप धारण कर उनके समक्ष विवाह का प्रस्ताव रखती है, जिसे प्रभु श्रीराम विवाहिक धर्म निभाने के लिए अस्वीकार कर देते हैं। फिर शूर्पणखा लक्ष्मण को रिझाने का प्रयास करती है तो वह गुस्से में अपने असली रूप में आकर माता सीता पर प्रहार करती है। लक्ष्मण को गुस्सा आ जाता है और वह तलवार से शूर्पणखा के नासिका भंग कर देते हैं। कार्यक्रम में श्री रामायण ट्रस्ट के संचालक विक्की कौशिक, रामलाल कौशिक, अमित कौशिक, मोहन कौशिक, प्रमोद कौशिक मौजूद रहे। संवाद