शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि राजा राज करे, धर्म का काम धर्माचार्यों पर छोड़ दें। ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि अयोध्या में शास्त्रीय परंपराओं का पालन नहीं किया जा रहा है।
ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शास्त्रीय परंपराओं का अनुसरण नहीं किया जा रहा। भारत में राजा और धर्माचार्य हमेशा से ही अलग रहे हैं, लेकिन अब राजा को ही धर्माचार्य बनाया जा रहा है। यह भारतीय परंपराओं के विरुद्ध है। वह 22 जनवरी को होने वाले श्रीराम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने अयोध्या नहीं जाएंगे।
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वह वृंदावन से पंजाब जाते समय वीरवार देर रात सोनीपत में वरिष्ठ अधिवक्ता पंडित अशोक शर्मा के आवास पर एक दिन के प्रवास पर पहुंचे थे। शुक्रवार को पंजाब की ओर प्रस्थान करने से पहले उन्होंने पत्रकारों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में सदैव से ही राजा राज करते रहे हैं और धर्म की स्थापना की जिम्मेदारी धर्माचार्यों पर छोड़ी जाती है।
वर्तमान समय में इन परंपराओं का निर्वहन नहीं किया जा रहा। अब राजा को ही धर्माचार्य माना जा रहा है। इसके तहत अयोध्या में होने वाले प्राण प्रतिष्ठा समारोह में तय किया गया है कि पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दर्शन करेंगे। उनके जाने के बाद धर्माचार्यों को दर्शन के लिए भेजा जाएगा जो पूर्णतया गलत है।
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उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की विशेषता है कि वह देश को एक रखता है। उत्तर और दक्षिण को एक बनाए रखने वाला केवल सनातन धर्म ही है। भाषा, खान-पान सब अलग है। उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम पूरा भारत एक है। कहीं का भी पंडित बुला लीजिए एक ही वेद मंत्र का पाठ करेंगे। बेशक वह जीवन में कभी मिले ही नहीं हो। एक ही शास्त्र का अनुसरण किया जाएगा।
मस्जिद के ढांचे को तोड़ना न्याय विधान के तहत नहीं था
महाराज ने कहा कि मस्जिद के ढांचे को तोड़ना भी न्याय विधान के तहत नहीं था। हिंदुओं को खुश करने के लिए ही इसे तोड़ा गया था जबकि न्याय विधान के तहत इसे प्राप्त किया जाना चाहिए था। जिस समिति ने केस जीता उसे बाद में हटा दिया गया और नई समिति बना दी गई, जो न्यायसंगत नहीं है।
अधूरे निर्माण कार्य में प्राण प्रतिष्ठा उचित नहीं
उन्होंने कहा कि किसी भी मंदिर में निर्माण कार्य पूर्ण होने से पहले प्रवेश या प्राण प्रतिष्ठा नहीं होती। प्राण प्रतिष्ठा तभी संभव है जब उसका निर्माण कार्य पूरा हो जाए। अयोध्या में फिलहाल गर्भगृह का फर्श बनाकर उस पर पिलर खड़े कर दिए गए हैं। मंदिर का पूर्ण निर्माण नहीं हुआ है। ऐसे में प्राण प्रतिष्ठा उचित नहीं है।