सोनीपत। सरकार की तरफ से लागू किए गए ई-टेंडरिंग के विरोध में सोनीपत खंड विकास एवं पंचायत (बीडीपीओ) कार्यालय में सरपंचों का धरना शनिवार को दूसरे दिन भी जारी रहा।
कड़ाके की ठंड के बीच बजट की निर्धारित की गई नई सीमा के विरोध में धरने पर बैठे सरपंचों ने कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक धरना जारी रहेगा। सरंपचों ने प्रदेश के पंचायती राज मंत्री देवेंद्र बबली को नसीहत देते हुए कहा कि सरपंचों पर राइट टू रिकॉल लागू करने से पहले वह स्वयं पर यह नियम लागू कर देख लें। सरपंचों ने कहा कि धरने की शुरूआत सोनीपत से हुई है। सोमवार को जिले के सभी खंडों के सरपंच धरनास्थल पर पहुंचेंगे और जुलूस निकालते हुए मुख्यमंत्री के नाम उपायुक्त को ज्ञापन सौंपेंगे।
सरकार ने पंचायतों के विकास कार्यों के लिए ई-टेंडरिंग नियम लागू किया है। जिसके तहत यह तय किया गया है कि किसी भी गांव में विकास कार्य की लागत दो लाख रुपये से अधिक है, तो उसके लिए ई-टेंडर जारी किए जाएंगे। यही नहीं कामों की जियो टैगिंग भी होगी। सरपंचों का कहना है कि इस नियम से ग्रामीण क्षेत्रों के कामों की रफ्तार धीमी पड़ जाएगी। सरपंच ठीक ढंग से काम भी नहीं करवा पाएंगे। गांव ताजपुर तिहाड़ खुर्द के सरपंच सुमेर दहिया ने कहा कि सरकार की ई-टेडरिंग प्रणाली गांवों के विकास में बाधा बनेगी। सरपंच केवल 2 लाख रुपये तक के कार्य ही सीधे तौर पर करवा पाएंगे, जबकि इससे अधिक बजट की जरूरत पड़ने पर टेंडर जारी होगा। जिससे न सिर्फ विकास कार्यों में देरी होगी, बल्कि काम भी बाधित रहेंगे। गांव हसनयारपुर तिहाड़ कलां के सरपंच पवन ने कहा कि सरकार सरपंचों को दो लाख रुपये तक का ही बजट देना चाहती है, लेकिन दो लाख रुपये में तो कोई भी काम नहीं हो पाएगा। ई-टेंडरिंग से काम प्रभावित होंगे, कोई टेंडर के लिए आगे नहीं आएगा। सरपंचों ने इस प्रक्रिया को तुरंत खत्म करने की मांग की।
बीडीपीओ कार्यालय में जुटेंगे सरपंच
सरपंचों के धरने का समर्थन कर रहे जिला पार्षद संजय बड़वासनिया ने बताया कि सरपंच रविवार को धरने पर नहीं बैठेंगे। सोमवार को जिले भर से सरपंच खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी (बीडीपीओ) कार्यालय (बीडीपीओ) परिसर में इकट्ठा होंगे। यहां से सभी जुलूस निकालते हुए लघु सचिवालय जाएंगे। जहां अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम उपायुक्त को ज्ञापन सौंपेंगे। संजय बड़वासनिया ने कहा कि गांवों के विकास को गति देने के लिए सरकार को सरपंचों की मांगे पूरी करनी चाहिए।