जिले में किसी भी जगह का पानी पीने लायक नहीं है और लोगों को जहरीला पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। जन स्वास्थ्य विभाग ने गांवों में जाकर पानी के सैंपल लेकर जांच की तो उसमें यह खुलासा हुआ। राई और फरमाना समेत 20 से ज्यादा गांवों में सप्लाई का पानी पीने लायक ही नहीं है और वह पानी ऐसा है जो लोगों को धीरे-धीरे रोगी बना रहा है। वहीं, जाखौली समेत अन्य जगहों पर स्वास्थ्य केंद्र व स्कूल में लगे ट्यूबवेल तक का पानी पीने के लायक नहीं है। पब्लिक हेल्थ ने 40 जगह से पानी के सैंपल लिए और वह सभी सैंपल फेल हो गए हैं। इस पानी की वजह से ही बीमारियां फैल रही हैं। इसमें भी पेट की सबसे ज्यादा बीमारी है।
पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए जन स्वास्थ्य विभाग की ओर से समय-समय पर सैंपल लिए जाते हैं। इसके तहत जन स्वास्थ्य विभाग ने 40 जगहों से सैंपल लिए, जिनमें गांवों में पानी की सप्लाई करने वाले ट्यूबवेल भी शामिल थे। उन ट्यूबवेल का पानी हर घर में सप्लाई होता है और अगर वह पानी ही पीने लायक नहीं होगा तो घरों के अंदर का पानी पीने लायक नहीं हो सकता है। उस पानी की जांच करने पर चौंकाने वाले नतीजे सामने आए, जिसमें से एक भी जगह का पानी ऐसा नहीं मिल सका जो पूरी तरह से स्वच्छ हो और वह पीने लायक हो। वहीं बीमारियां फैलने का सबसे बड़ा कारण भी इस पानी को माना जा रहा है।
पानी में इस तरह होनी चाहिए तत्वों की मात्रा
पानी में टीडीएस 500-2000 मिग्रा प्रति लीटर होनी चाहिए। वहीं कुल भारीपन 200-600 मिग्रा प्रति लीटर होना चाहिए। कैल्शियम 75-200 मिग्रा प्रति लीटर, क्लोराइड 250-1000 मिग्रा प्रति लीटर, सल्फेट 200-400 मिग्रा प्रति लीटर, फ्लोराइड 1-1.5 मिग्रा प्रति लीटर, आयरन 0.3 मिग्रा प्रति लीटर तक होना चाहिए। इस तरह रासायनिक तत्व होते हैं तो वह पानी पीने लायक होता है।
जाखौली पीएचसी से लिए गए सैंपल में हार्डनेस 640, कैल्शियम 240 व सल्फेट 522 मिग्रा प्रति लीटर मिली तो वहां के प्राइमरी स्कूल में हार्डनेस 750, कैल्शियम 236 व सल्फेट 480 मिग्रा प्रति लीटर मिले हैं।
राई के ट्यूबवेल के पानी का टीडीएस 3800, कैल्शियम 380, क्लोराइड 1100, सल्फेट 820, फ्लूराइड 2.77 मिग्रा प्रति लीटर है।
फरमाना के ट्यूबवेल के पानी का टीडीएस 2820, हार्डनेस 2040, कैल्शियम 784, क्लोराइड 1550 मिग्रा प्रति लीटर है।
कटवाल के ट्यूबवेल नंबर दो के पानी का टीडीएस 2760, हार्डनेस 850, कैल्शियम 324, क्लोराइड 1030, फ्लोराइड 1.59 मिग्रा प्रति लीटर है।
पीपली के ट्यूबवेल नंबर दो के पानी में हार्डनेस 850, कैल्शियम 292, सल्फेट 588 मिग्रा प्रति लीटर है।
इन गांवों के पानी में मिले बैक्टीरिया
पानी में बैक्टीरिया की प्रतिशतता 0 होनी चाहिए, लेकिन गांवों से लिए गए पानी के सैंपल में बैक्टीरिया की प्रतिशतता 100 से भी ज्यादा मिली। नसीरपुर बांगर में आंगनबाड़ी के ट्यूबवेल के पानी में 120, झरोठ के ट्यूबवेल के पानी में 120, कुराड़ के पानी में 120, रिढ़ाऊ के पानी में 11, पलड़ा के पानी में 11, मझरौली के पानी में 120, गढ़मिर्कपुर के पानी में 11, नाहरा के पानी में नौ प्रतिशत, तुर्कपुर के पानी में 120, हरसाना के पानी में 11, राजपुर के पानी में 93, हलालपुर के पानी में 93, पिनाना के पानी में 120 प्रतिशत बैक्टीरिया मिले हैं। इनके अलावा भी अधिकतर गांवों के पानी में बैक्टीरिया मिले हैं, जो शरीर पर विपरीत प्रभाव डालते हैं।
ऐसे पानी से हो सकता है डायरिया, हैजा, पीलिया
डिप्टी सीएमओ डॉ. आदर्श शर्मा ने बताया कि दूषित पानी से डायरिया की बीमारी सबसे ज्यादा होती हैं। इसके अलावा हैजा, पीलिया व पेट के अन्य रोग हो सकते हैं। अगर दूषित पानी को लंबे समय तक लोग पीते रहे तो उससे पथरी भी हो जाती है। पानी के कारण ही इस समय पथरी के रोगी सबसे ज्यादा आते हैं, जिसका सबसे बड़ा कारण भारी पानी है। इसके लिए पानी को हमेशा उबालकर पीना चाहिए, जिससे उसके बीमारी वाले कीटाणु व भारीपन खत्म हो जाए। एक साथ पानी को उबालकर बाद तक भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
पब्लिक हेल्थ की ओर से समय-समय पर पानी के सैंपल लिए जाते हैं, जिसमें अधिकतर जगह के सैंपल फेल हुए हैं और पानी पीने के लायक नहीं है। किसी जगह का पानी भारी है तो किसी जगह के पानी में रासायनिक तत्व ज्यादा है। इस तरह पानी में परेशानी मिल रही है। - राजीव गुप्ता, एक्सईएन पब्लिक हेल्थ