दंगल के बाद भीम को गदा व स्मृति चिह्न भेंट करते अभिनेता संजय पाराशर। फाइल फोटो
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महाभारत में भीम का किरदार निभा ख्याति प्राप्त करने वाले प्रवीन सोबती अब हमारे बीच नहीं रहे। मूलरूप से पंजाब के रहने वाले प्रवीण सोबती काफी समय से अशोक विहार दिल्ली में रहते थे। लंबी कद काठी के प्रवीण सोबती सौम्य स्वभाव के और बेहद मिलनसार थे। 20 साल पहले वर्ष 2002 में वह हरियाणा के सोनीपत के गांव खेड़ी मनाजात में आयोजित दंगल में बतौर विशिष्ट अतिथि पहुंचे थे। दंगल संचालक खेड़ी मनाजात निवासी अभिनेता संजय पाराशर के कदम की उन्होंने तारीफ की थी। उन्होंने कहा था कि ऐसे आयोजनों से खेलों को बढ़ावा मिलता है और युवाओं को आगे बढ़ने का रास्ता मिलता है।
अभिनेता संजय पाराशर ने बताया कि महाभारत के भीम के नाम से प्रसिद्ध प्रवीण सोबती ने करीब 30 फिल्मों में अभिनय किया है। अभिनय के साथ ही वह खेलों में भी सक्रिय रहते थे। अभिनय की दुनिया में कदम रखने से पहले प्रवीण सोबती एक हैमर और डिस्कस थ्रो एथलीट थे। वह एशियाई खेलों में दो स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य पदक जीत चुके हैं।
उन्होंने दो बार ओलंपिक खेलों में भी देश का प्रतिनिधित्व किया था। उनकी प्रतिभा के चलते उन्हें अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। खेल के कारण ही उन्हें बीएसएफ में डिप्टी कमांडेंट की नौकरी मिली थी। बीआर चोपड़ा के महाभारत सीरियल के बाद से दुनिया उन्हें भीम के नाम से जानने लगी थी।
वर्ष 2002 में गांव खड़ी मनाजात में आयोजित दंगल में बतौर विशिष्ट अतिथि पहुंचे प्रवीण सोबती उर्फ भीम दंगल संचालक अभिनेता संजय पाराशर के साथ।
एक खिलाड़ी होने के कारण ही वे खेलों के महत्व को जानते थे। यही कारण था कि खेड़ी मनाजात में आयोजित दंगल में पहुंचने पर उन्होंने विजेता खिलाड़ियों को पुरस्कृत करते हुए खेलों में बेहतर करने के लिए प्रेरित किया था। दंगल में भीम के बतौर विशिष्ट अतिथि पहुंचने की सूचना पर ही दूर-दराज के लोग भी काफी संख्या में पहुंचे थे।
मुंबई में हुई थी मुलाकात
संजय पाराशर ने बताया कि वर्ष 2000 से पहले मुंबई में एक स्टूडियो में उनसे मुलाकात हुई थी। प्रवीण से ऐसा रिश्ता जुड़ा कि परिवार के सदस्य के समान हो गए थे। स्टूडियो में, कार्यक्रमों में, घर पर किसी फंक्शन में आना-जाना होता रहता था। उनके यूं इस दुनिया से चले जाने का गहरा आघात लगा है।
सहायता के लिए सदैव रहते थे तत्पर
प्रवीण सोबती जरूरतमंदों की सहायता करने के लिए सदैव तत्पर रहते थे। उन्होंने पंजाब के कई युवाओं को मेरे पास भेजा था और कहा था कि इन्हें काम दिलवाना। ऐसे ही मैंने भी कई बार उनसे कहकर कई युवाओं को काम दिलवाया था।