फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कम नहीं हो रहा प्रदूषण का स्तर, एक्यूआई फिर 329 पर पहुंचा

विज्ञापन
गांव राई के पास हाईवे के निकट छाया स्मॉग। संवाद - फोटो : Sonipat
विज्ञापन
दिल्ली एनसीआर में शामिल सोनीपत में प्रदूषण का स्तर मंगलवार को भी बेहद खराब स्थिति में बना रहा। सुबह और रात को स्मॉग छाने से लोगों की परेशानी बढ़ गई। इससे सांस के मरीजों को ज्यादा परेशानी हो रही है। लोगों को गले में दिक्कत महसूस होने लगी है। सोमवार को कुछ राहत के बाद मंगलवार सुबह फिर कई इलाकों में स्मॉग के कारण हवा दमघोंटू बनी रही।
विज्ञापन

मौसम में सर्दी बढ़ने के बाद से वायु प्रदूषण भी खतरनाक स्तर पर बना हुआ है। सुबह-शाम तो स्मॉग छा जाता है। दिन में हवा चलने से मौसम थोड़ा साफ हो जाता है, लेकिन यह समस्या कम नहीं हो रही है। जिले का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) बढ़ रहा है। यह बेहद खराब स्तर पर जा चुका है। सर्दी बढ़ने के साथ ही प्रदूषण के स्तर में और इजाफा होने का अनुमान है। सोमवार को एक्यूआई 290 पर आ गया था, लेकिन मंगलवार को फिर से बढ़कर 329 पर पहुंच गया। जिससे लोगों को परेशानी हो रही है। जिले में मंगलवार को पीएम-10 का स्तर 400 व पीएम 2.5 का स्तर 372 तक पहुंच गया है। यह स्वास्थ्य के लिए बेहद खराब स्थिति में है।
लोगों को घर रहने की दी जा रही सलाह
बढ़ता प्रदूषण लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है। इसमें बुजुर्गों और सांस के मरीजों के लिए यह बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए लोगों को घरों में रहने की सलाह दी जा रही है। यहां तक कि घर से कार्य करने की सलाह दी गई है। चिकित्सक स्मॉग में बाहर न निकलने की हिदायत दे रहे हैं। साथ ही लोगों को बेहतर क्वालिटी का मास्क लगाने की हिदायत दे रहे हैं।
विज्ञापन

ज्यादा खतरनाक है पीएम-2.5
पीएम-10 के कण मोटे होते हैं। ऐसे में यह त्वचा व आंखों में चुभन पैदा करते हैं। मास्क लगाने से इनको काफी हद तक रोका जा सकता है। साथ ही नाक के बालों और फेफड़ों में भी पीएम-10 के कण रोक लिए जाते हैं। इनके कारण सांस की बीमारियां, गले के रोग, फेफड़े के रोग, आंखों की बीमारियां और त्वचा व बालों के रोग होते हैं। वहीं पीएम-2.5 के कण काफी बारीक होते हैं। यह मास्क लगाने पर भी नहीं रुकते हैं। यह फेफड़ों से भी सीधे रक्त में प्रवेश कर जाते हैं। इसके कारण मस्तिष्क, हृदय, गुर्दे व आंतों को नुकसान पहुंचता है।
वर्जन
प्रदूषण की परत अभी छाई हुई है। इसके जल्द छंटने की उम्मीद नहीं है। लोगों को प्रदूषण से बचकर रहना होगा। मास्क लगाकर रहने और बहुत जरूरी होने पर ही घरों से बाहर निकलने की सलाह दी जाती है। लापरवाही सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकती है।
विज्ञापन

- डॉ. प्रेमदीप सिंह, मौसम विज्ञानी, कृषि विज्ञान केंद्र, सोनीपत
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें