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यूक्रेन में फंसे जिगर के टुकड़े, परिजनों को नहीं आ रही नींद

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रोमानिया में विद्यार्थियों के साथ -6 डिग्री तापमान में खड़ा ऋषभ। - फोटो : Sonipat
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गन्नौर शहर और ग्रामीण क्षेत्र से मेडिकल की पढ़ाई करने यूक्रेन गए बड़ी संख्या में विद्यार्थी अभी भी अलग-अलग शहरों में फंसे हुए हैं। इनमें से कुछ विद्यार्थी बुधवार को हंगरी, पोलैंड और रोमानिया सीमा तक पहुंच गए हैं। जिसके बाद परिजनों में उनके सुरक्षित घर पहुंचने की उम्मीद जगी है। गन्नौर शहर निवासी हर्षित 1 मार्च को हंगरी पहुंच चुका है।
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हर्षित के परिजनों का कहना है कि वह 2018 में मेडिकल की पढ़ाई के लिए यूक्रेन गया था। वह कई दिनों से बंकर में था। 28 फरवरी को किसी तरह वहां से निकला और साथियोें के साथ बस से 1000 किलोमीटर की दूरी तय कर 18 घंटे में 1 मार्च को हंगरी पहुंचा। उम्मीद है कि वीरवार को वह अपने वतन लौट आए।
परिजनों ने बताया कि हर्षित अगस्त 2021 में अपनी बहन की शादी में घर आया था और अक्तूबर में वापस चला गया। अब परिजन उसके सकुशल लौटने की राह देख रहे हैं।
कई दिनों तक बंकर मेें रहा
गुमड़ निवासी सुकस पहल 2020 में मेडिकल की पढ़ाई के लिए खारकीव शहर गया था। युद्ध शुरू होने के बाद से वह कई दिनों तक बंकर में रहा। 1 मार्च की सुबह मेट्रो से हंगरी के लिए निकला। 18 घंटे का सफर तय कर वह दूसरे स्टेशन पर पहुंचा। अब वह बस से हंगरी तक जाएगा। सुकस लगातार अपने परिजनों के संपर्क में है। फोन बंद नहो जाए इस डर से वह अपने परिजनों के पास संदेश से कुछ घंटों के बाद संपर्क कर रहा है। हंगरी तक पहुंचने के बाद परिजनों को बेटे के सकुशल लौटने की उम्मीद बंधी है।
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बच्चों के घर पहुंचने तक सताती रहेगी चिंता
रोमानिया बॉर्डर पहुंचे गन्नौर शहर निवासी ऋषभ ने परिजनों से बातचीत कर बताया कि जो विद्यार्थी 27 फरवरी को रोमानिया बॉर्डर पहुंचे थे, पहले उन्हें भारत के लिए रवाना किया जाएगा। उसके बाद जो विद्यार्थी 28 फरवरी को पहुंचे थे, उनका नंबर आएगा। ऋषभ के पिता गौतम ने बताया कि उसके दो बेटे ऋषभ व प्रतीक यूक्रेन में फंसे हुए हैं, जब तब उनके बच्चे ठीक घर नही पहुंच जाते, तब तक उनको अपने बच्चों की चिंता सताती रहेगी।
गन्नौर के विद्यार्थी यूक्रेन में फंसे
बीएसटी कॉलोनी निवासरी राहुल खारकीव में फंसा हुआ है। गुमड़ की नेहा कीव शहर में थी, जो अब हंगरी पहुंच चुकी है। गांधी नगर निवासी शिल्पा अभी रोमानिया बॉर्डर पर है और प्रिंस खारकीव में फंसा हुआ है। जब तक सभी छात्र सुरक्षित घर नहीं आ जाते, तब तक परिजनों की चिंता कम नहीं होगी। परिजनों ने सरकार से उनके बच्चों को सुरक्षित अपने देश पहुंचाने की मांग की है। पुगथला निवासी सुमीर मलिक का पिछले दो दिनों से परिजनों से संपर्क नहीं हुआ है। जिस कारण उनको उसकी चिंता सता रही है।
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