नेशनल हाईवे (एनएच)-44 पर फ्लाईओवर निर्माण के चलते उड़ रही धूल के कारण बीसवां मील मार्केट व आसपास रहने वाले लोगों के साथ ही वाहन चालकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। लोगों को यहां सफर के दौरान सांसों में घुटन व आंखों में चुभन का सामना करना पड़ रहा है। धूल के कारण हादसा होने का भी डर बना रहता है। साथ ही आसपास रहने वाले लोगों व काम करने वालों के खाने तक में धूल गिर रही है। लोगों ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण व निर्माण कंपनी से इस समस्या को दूर करने की मांग की है।
कुंडली-सिंघु बॉर्डर पर किसानों के लंबे आंदोलन के चलते 13 माह तक हाईवे जाम रहा था। जिसके चलते बीसवां मील से कुंडली बॉर्डर तक नेशनल हाईवे-44 के चौड़ीकरण व फ्लाईओवर निर्माण का कार्य रुक गया था। अब एनएचएआई की तरफ से युद्ध स्तर पर इसका निर्माण किया जा रहा है। लेकिन लोगों के लिए नई मुसीबत खड़ी हो गई है। सड़क पर उड़ने वाली धूल वाहन चालकों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है। लगातार धूल उड़ने से कई बार दिखाई भी नहीं देता, जिससे हादसे का डर रहता है। ऐसे में लोगों को आवागमन करने में काफी कठिनाई हो रही है। इस मार्ग पर डाली गई मिट्टी, राख व मिक्स मैटेरियल लोगों के लिए आफत बन गई है। दिनभर धूल उड़ती रहती है। पर्याप्त मात्रा में पानी का छिड़काव नहीं किए जाने से राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खासकर दोपहिया व छोटे वाहन चालकों को दिक्कत होती है।
आसपास के लोगों का जीना मुहाल
एनएच-44 पर बीसवां मील के आसपास रहने वाले लोगों का जीना मुहाल हो गया है। लोगों का आरोप है कि पानी का छिड़काव नहीं होने के कारण धूल उड़ती रहती है। यहां तक की खाने में भी धूल गिर जाती है। जिससे उनकी मुसीबत बढ़ रही है। उड़ती धूल के कारण लोग बीमारी से पीड़ित हो रहे हैं। लोगों ने सड़क निर्माण कर रही कंपनी से पर्याप्त मात्रा में पानी का छिड़काव कराने की मांग की है।
हाईवे पर फ्लाईओवर निर्माण के चलते लगातार मिट्टी और राख डाली गई है। जिससे धूल का गुबार उड़ता रहा है। धूल खाने में गिरने से परेशानी हो रही है। धूल भरा खाना खाने से बीमार होने का अंदेशा बना हुआ है। इसे लेकर पहल की जानी चाहिए। जब तक निर्माण कार्य नहीं होता तब तक पानी का छिड़काव कराया जाना चाहिए।
मोहम्मद सोहराब अंसारी, क्षेत्रवासी
बीसवां मील के पास फ्लाईओवर निर्माण के चलते लगातार धूल उड़ रही है। धूल के चलते वाहन चलाने में खतरा रहता है। हादसे का अंदेशा बना रहता है। अगर समय पर पानी का छिड़काव होते रहे तो धूल नहीं उड़ेगी। इससे हादसों से भी बचा जा सकेगा। -अमित, राहगीर।
हाईवे पर निर्माण कार्य के चलते धूल उड़ रही है। जिससे लोग बीमार हो रहे हैं। धूल से एलर्जी होने के कारण लोग बीमार पड़ रहे हैं। घर के बाहर वाहन खड़ा करने पर उस पर धूल जम जाती है। घरों की छतों पर काली राख जमा हो जाती है। दोपहिया वाहन व पैदल राहगीरों को ज्यादा दिक्कत हो रही है। संबंधित निर्माण कंपनी के अधिकारियों को शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। राजेश सोलंकी, क्षेत्रवासी।
धूल के कारण घरों के छत से लेकर कमरों के अंदर तक राख जम रही है। खाने के सामान में धूल मिल जाती है। छत पर कपड़े सुखाने को डालते है तो उन पर काली राख जम जाती है। एनएचएआई व संबंधित निर्माण कंपनी को चाहिए कि वह लगातार पानी का छिड़काव करते रहे। धूल के चलते बच्चों को घरों के बाहर खेलने भी नहीं भेज सकते। ब्रजेश, दुर्गा कॉलोनी।
एनएच-44 पर उड़ रही धूल का मामला संज्ञान में है। बीसवां मील चौक पर फ्लाईओवर के निर्माण के चलते धूल उड़ रही। धूल को उड़ने से रोकने के लिए लगातार पानी का छिड़काव किया जा रहा है। अप्रैल के अंत तक इस फ्लाईओवर का निर्माण कार्य पूरा कर दिया जाएगा। -आनंद दहिया, डीजीएम, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण।