टोक्यो पैरालंपिक में सुमित आंतिल के स्वर्ण पदक जीतते ही पूरा गांव खुशी से झूम उठा। ग्रामीणों ने ढोल नगाड़े बजाते हुए जमकर जश्न मनाया। ग्रामीणों ने मिठाइयां खिलाकर परिजनों को बधाई दी। लाडले की जीत पर खुशी से फूली नहीं समा रहीं मां निर्मला देवी ने कहा कि पैरालंपिक के लिए रवाना होने से पहले सुमित ने कहा था, मां चिंता मत करना, स्वर्ण पदक जीतकर ही लौटूंगा। आज बेटे ने अपना वादा पूरा कर दिखाया और गांव का नाम विश्व पटल पर चमका दिया। सुमित के परिजनों व ग्रामीणों का कहना है कि सुमित जब गांव लौटेगा तो उसका पूरा गांव एकजुट होकर जोरदार स्वागत करेगा।
लाडले ने कर दिया जीवन सफल
5 जनवरी 2015 को सड़क हादसे में सुमित को एक पैर गंवाना पड़ा था। तीन बहनों के इकलौते भाई के साथ हुए हादसे के बाद मैं हमेशा रोती रहती थीं। उस समय सुमित कहता था, मां! रो मत, तेरी झोली में दुनियाभर की सारी खुशियां डाल दूंगा। लाडले ने जो कहा था, आज उसे पूरा कर दिखाया। बुलंद हौसले के साथ सुमित ने इतिहास रचते हुए मेरा जीवन सफल कर दिया और पूरे गांव का नाम विश्व पटल पर चमका दिया।
निर्मला देवी, सुमित आंतिल की मां
रक्षाबंधन के तोहफे के रूप में भाई ने दिया सबसे बड़ा तोहफा
सुमित जब टोक्यो के लिए रवाना हुआ था तो उससे पहले राखी बंधवाने के लिए घर पहुंचा था। राखी बांधने के बाद उसने पूछा था कि क्या गिफ्ट चाहिए। मैंने पैरालंपिक में स्वर्ण पदक लाने की मांग की थी। इस पर सुमित ने कहा था कि यह तोहफा तुझे जरूर दूंगा। आज भाई ने स्वर्ण पदक जीत हमें सबसे बड़ा तोहफा दिया है। आज जो खुशी मिली है, उसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। देशवासियों को यही कहूंगी कि जिंदगी किसी हादसे के बाद थम नहीं जाती, हौसले के साथ आगे बढ़ोगे तो सफलता जरूर मिलेगी।
- किरण, सुमित आंतिल की बहन
सुमित ने किया नाम रोशन, करेंगे शानदार स्वागत
सुमित की उपलब्धि उसके कड़े परिश्रम व परिवार की मेहनत का परिणाम है। परिवार ने सुमित का कभी हौसला नहीं टूटने दिया। सुमित के पिता का उस समय देहांत हो गया था, जब वह मात्र 7 वर्ष का था। ऐसे में सुमित की मां ने जिम्मेदारी संभाली और सुमित को सहारा दिया। इससे पहले राई हलके से रवि दहिया व सुमित कुराड़ टोक्यो ओलंपिक में शानदार खेल दिखाकर पदक जीत चुके हैं। राई हलके के लोगों को अपने खिलाड़ियों पर नाज है। सुमित के लौटने पर शानदार स्वागत किया जाएगा।
- मोहन लाल बड़ौली, राई विधायक