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पुराने वाहनों के संचालन पर रोक से यूनियन में खड़े हैं 300 से ज्यादा ट्रक

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ट्रक यूनियन परिसर में एकत्रित होकर सरकार के खिलाफ रोष जताते ट्रक मालिक व चालक। संवाद - फोटो : Sonipat
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प्रदूषण के नाम पर 10 साल से पुराने डीजल वाहनों के संचालन पर लगाई गई रोक के बाद ट्रक मालिकों व चालकों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। शनिवार को ट्रक ऑपरेटरों ने बहालगढ़ रोड स्थित ट्रक यूनियन परिसर में सरकार के इस नियम के खिलाफ प्रदर्शन किया।
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ट्रक यूनियन के प्रधान सुरेंद्र दहिया के नेतृत्व में ट्रक ऑपरेटर्स ने सरकार से मांग की है कि नियमों में बदलाव किया जाए और 15 साल तक ट्रकों को सड़कों पर चलने की अनुमति दी जाए। उन्होंने बताया कि एक ट्रक लेने में लाखों खर्च होते हैं। सरकार द्वारा निर्धारित की गई 10 साल की अवधि में तो ट्रक की लागत भी नहीं निकल पाती। ऐसे में वे अपने परिवार का पालन-पोषण कैसे करेंगे।
बढ़ते प्रदूषण के नाम पर केंद्र सरकार ने नए नियम निर्धारित किए हैं, जिनके अनुसार दिल्ली व एनसीआर क्षेत्र में 10 साल से पुराने डीजल और 15 साल से पुराने पेट्रोल के वाहनों के संचालन पर रोक लगा दी गई है। इसके बाद पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी सख्ती बरतते हुए ऐसे वाहनों को जब्त कर रहे हैं। यही कारण है कि उन्होंने मजबूरन 10 साल से पुराने ट्रकों को यूनियन में ही खड़ा कर दिया है। ये वाहन 40 दिन से ट्रक यूनियन में ही खड़े हैं। इसके बाद से ट्रक मालिकों व चालकों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। इसको देखते हुए भाईचारा ट्रक ऑनर्स एसोसिएशन के आह्वान पर ट्रक मालिकों व चालकों ने एकत्रित होकर सरकार के खिलाफ रोष जताया।
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अभियान के चलते ट्रक यूनियन कार्यालय परिसर में 300 से अधिक वाहन खड़े हो गए हैं। ट्रक ऑपरेटर्स का कहना है कि उनके ट्रक प्रदूषण को लेकर होने वाले सभी टेस्ट पास करते हैं। सरकार अगर प्रदूषण को कम करने के लिए यह कदम उठा रही है तो फिर जो वाहन प्रदूषण फैलाते हैं, उन्हें रोकना चाहिए, न कि सभी वाहनों पर एक साथ रोक लगा देनी चाहिए। ट्रक ऑपरेटर्स ने दिल्ली सरकार पर आरोप लगाया कि सरकार ग्रीन टैक्स वसूलती है, लेकिन उस टैक्स का इस्तेमाल नहीं करती। दिल्ली-एनसीआर के सभी आउटर रोड टूटे हुए हैं। इस कारण प्रदूषण अधिक फैलता है।
15 साल की ली रजिस्ट्रेशन फीस, अब 10 साल में कर रहे बंद
भाईचारा ट्रक ऑनर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि पहले सरकार ने 15 साल तक रजिस्ट्रेशन फीस जमा करवा ली। अब सरकार ने 10 साल पुराने भारी वाहनों के संचालन पर रोक लगा दी। इससे वाहन मालिकों व चालकों को नुकसान झेलना पड़ रहा है। ट्रक ऑपरेटर्स ने कहा कि सरकार ने जल्द नियमों में बदलाव नहीं किया तो वे आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेंगे।
वर्जन
बीमा, रोड टैक्स, पॉल्यूशन टैक्स समेत अन्य टैक्स जमा करने के बाद भी भारी वाहनों के संचालन को बंद किया जा रहा है। सरकार की इस नीति के कारण ट्रक मालिकों व चालकों की परेशानियां बढ़ती जा रही हैं। इस संबंध में राष्ट्रीय स्तर की ट्रांसपोर्ट यूनियनों को भी पत्र लिखा गया है। वहां से आदेश मिलने के बाद मांगों के लिए हड़ताल का रुख अपनाया जा सकता है।
- सुरेंद्र दहिया, प्रधान भाईचारा ट्रक ऑनर्स एसोसिएशन
यह बोले ट्रक मालिक
सरकार को 10 साल पुराने भारी वाहनों के संचालन पर लगाई गई रोक को लेकर पुनर्विचार कर लेना चाहिए। 10 साल पुराने वाहन अभी ठीक हालत में हैं, ज्यादा प्रदूषण भी नहीं फैलाते। 10 साल में एक ट्रक से इतनी कमाई भी नहीं होती, जितनी रकम एक ट्रक को खरीदने में लग जाती है। ट्रक मालिकों की समस्या को देखते हुए केंद्र की ओर से सही कदम उठाए जाने चाहिए।
- इंद्र कुमार, ट्रक मालिक
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10 साल पुराने भारी वाहनों के संचालन पर रोक लगने के बाद हजारों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट आ गया है। 40 दिन से ट्रक नहीं चल रहे। ऐसे में परिवार का पालन-पोषण करने में परेशानी आने लगी है। सरकार की ओर से चालकों व उनके साथ रहने वाले क्लीनरों के पास कमाने के लिए अन्य कोई साधन नहीं बचा है।
- राजकुमार, ट्रक मालिक
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सरकार लोगों को बार-बार परेशान कर रही है। सरकार लोगों को अपना वाहन चलाने से रोक रही है। इस तरह की नीतियों के कारण लोग बेरोजगार हो रहे हैं। स्कूलों में बच्चों की फीस भरने में परेशानी हो रही है। 10 साल पुराने भारी वाहनों के संचालन पर रोक लगाने के बजाय मालिकों को राहत देनी चाहिए।
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- रणधीर ट्रक मालिक

ट्रक यूनियन परिसर में 40 दिन से खड़े 10 साल पुराने भारी वाहन। संवाद- फोटो : Sonipat

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