सोनीपत। द सोनीपत सहकारी चीनी मिल के निलंबित मुख्य अभियंता की ओर से मिल प्रबंधन पर ई-टेंडर मामले में उनके फर्जी हस्ताक्षर इस्तेमाल करने के लगाए गए आरोपों को प्रबंध निदेशक डॉ. अनुपमा मलिक ने निराधार बताया। उन्होंने कहा कि चीनी मिल प्रबंधन की छवि को खराब करने की कोशिश की गई है। टेंडर प्रक्रिया में प्रबंध निदेशक का किसी प्रकार से सीधा हस्तक्षेप नहीं होता। वहीं निलंबित मुख्य अभियंता देवेंद्र पहल ने एक दिन पहले सिविल लाइन थाने में शिकायत देकर निष्पक्ष जांच की मांग की थी। अब जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
निलंबित मुख्य अभियंता देवेन्द्र पहल ने मिल प्रबंधन पर आरोप लगाते हुए बताया था कि उन्हें 17 जून को निलंबित कर दिया था। परंतु उसके बाद 20 जुलाई को मिल प्रशासन ने ई-टेंडर अपलोड किया। निलंबित मुख्य अभियंता देवेन्द्र पहल ने आरोप लगाया कि ई-टेंडर के पेज नंबर 42 से 45 पर उनकी तरफ से कोई हस्ताक्षर नही किए गए थे। उन्होंने बताया था कि इस संबंध में उन्होंने इसकी शिकायत शुगरफेड पंचकूला को दी। जिसके बाद मिल प्रशासन ने आनन-फानन में इस टेंडर को हरियाणा सरकार की वेबसाइट से हटा दिया गया।
टेंडर प्रक्रिया के लिए किया गया है कमेटी का गठन
मामले में प्रबंध निदेशक डॉ. अनुपमा मलिक ने बताया कि टेंडर प्रक्रिया में प्रबंध निदेशक का किसी प्रकार का कोई सीधा हस्तक्षेप नहीं होता। टेंडर प्रक्रिया के लिए सात सदस्यीय कमेटी गठित कर रखी है। यही कमेटी टेंडर लगाती है, दस्तावेजों की जांच कर इसे अपलोड करती है। उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होती है। कोई भी कंपनी टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा ले सकती है। ऐसे में कहीं भी धांधली होने की आशंका नहीं होती। फिर भी पूरे मामले की जांच की जाएगी।