नगर निगम से तीन साल पहले 12 गांवों को बाहर किए जाने के बावजूद बिजली निगम की ओर से बिलों में एससी टैक्स (निगम कर) जोड़कर भेजा जा रहा है। यहां के ग्रामीण बिजली निगम के अधिकारियों को बिलों से एमसी टैक्स हटवाने के लिए शिकायत कर चुके हैं, उसके बाद भी समाधान नहीं किया गया है। ऐसे में खेवड़ा के ग्रामीणों ने बुधवार को एकत्रित होकर बिजली निगम के अधिकारियों के खिलाफ रोष जताया। साथ ही ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि तीन साल से लगातार वसूले जा रहे एमसी टैक्स को वापस नहीं किया तो वे कोर्ट जाने को मजबूर होंगे।
वर्ष 2015 में प्रदेश सरकार की ओर से 24 गांवों को मिलाकर नगर निगम बनाया गया था। इसके बाद बिजली निगम के अधिकारियों ने इन गांवों के लोगों के पास एमसी टैक्स जोड़कर बिल भेजे जाने लगे। नगर निगम में शामिल होने के बाद लोगों ने सरकार के खिलाफ आंदोलन करना शुरू किया था।
इन गांवों को जुलाई 2018 में किया था निगम से बाहर
लोगों का विरोध बढ़ता देख प्रदेश सरकार ने जुलाई 2018 में मुरथल, कुमासपुर, किशोरा, नांगल खुर्द, चौहान जोशी, बहालगढ़, खेवड़ा, दीपालपुर, मुकीनपुर, असावरपुर, बैंयापुर खुर्द, हरसाना कलां गांव को नगर निगम से बाहर कर दिया दिया था, लेकिन बिजली निगम के अधिकारियों द्वारा भेजे जा रहे बिलों से एमसी टैक्स को नहीं हटाया। हर बिल के साथ लोगों से एमसी टैक्स वसूला जा रहा है। इसके विरोध में बुधवार को खेवड़ा के ग्रामीण आगे आए।
यह बोले ग्रामीण
ग्रामीण रामकिशन, तूफान, गोपी, कालेराम, राधेश्याम ने कहा कि बिजली निगम की ओर से बिल में जोड़कर भेजे जा रहे एमसी टैक्स को हटवाने के लिए कई बार मांग कर चुके हैं। उसके बावजूद बिजली निगम के अधिकारियों द्वारा उनके बिलों से एमसी टैक्स नहीं हटाया जा रहा है। ऐसे में उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उनकी मांग है कि जुलाई 2018 से अब तक वसूले गए एमसी टैक्स को उनके मूल बिलों में एडजस्ट किया जाए। बिजली निगम की ओर से उनकी समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वह कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर हो जाएंगे।
वर्जन
नगर निगम से हटाए गए 12 गांवों में भेजे जा रहे बिजली बिलों की जांच कराई जाएगी। अगर बिलों में एमसी टैक्स जोड़ा गया है तो उसे अगले बिलों में एडजस्ट कर दिया जाएगा।
- संदीप जैन, एसई बिजली निगम