अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजय पाराशर की अदालत ने हत्या के मामले में गवाह सैलून संचालक की हत्या में तीन दोषियों को उम्रकैद व अवैध हथियार के मामले में चौथे को सात साल कैद की सजा सुनाई है। चारों पर जुर्माना भी लगाया गया है।
गांव सेरसा में 28 मई, 2017 की रात की हेयर सैलून संचालक वीरेंद्र उर्फ धाकड़ की गोली मारकर हत्या कर दी थी। हत्या का आरोप गांव के शांतनु व उसके साथियों पर लगा था। मृतक के पिता का आरोप था कि शांतनु के भाई संदीप ने अपने साथी अमित के साथ मिलकर 26 मार्च, 2016 को गांव के ही प्रवीण की हत्या की थी। वह उसके बेटे के सैलून पर सेविंग कराने आया था। इस दौरान हमलावरों ने वीरेंद्र को भी गोली मार दी थी। हमले में वीरेंद्र बच गया था और उसने संदीप व अमित के खिलाफ कोर्ट में गवाही दी थी, जिसका बदला लेने के लिए ही शांतनु ने साथियों के साथ मिलकर उसके बेटे की हत्या कर दी थी। पुलिस ने जयभगवान के बयान पर गांव के शांतनु व दो अन्य को हत्या के मामले में नामजद किया था। मामले में पुलिस गांव सेरसा निवासी शांतनु, दिल्ली के गांव टीकरी निवासी हरदीप उर्फ अमित उर्फ मीता व गांव सेरसा निवासी सुमित उर्फ कसाब को गिरफ्तार कर लिया था। बाद में आरोपी गांव सफियाबाद के प्रदीप उर्फ खीलू को गिरफ्तार किया था। उनके कब्जे से हथियार बरामद किए गए थे।
मंगलवार को मामले की सुनवाई करते हुए एएसजे अजय पाराशर की अदालत ले प्रदीप उर्फ खीलू को हत्या के मामले में उम्रकैद व 5 हजार रुपये जुर्माना, हरदीप व शांतनु को हत्या व अवैध हथियार के मामले में उम्रकैद व सात-सात हजार रुपये जुर्माना तथा सुमित को अवैध हथियार के मामले में सात साल कैद व दो हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।