लक्ष्य निर्धारित कर उसे पाने के लिए कड़ी मेहनत की जाए तो बड़ी से बड़ी बाधा भी आपका रास्ता रोक नहीं सकती। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है हरियाणा के सोनीपत जिले के गांव मुरथल निवासी कार्तिक राजौरा ने। कड़ी मेहनत से अपने दूसरे ही प्रयास में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की भारतीय इंजीनियरिंग सेवा (आईईएस) की परीक्षा पास कर देश में 33वीं रैंक हासिल की।
गांव मुरथल निवासी कार्तिक के चाचा सतीश ने बताया कि कार्तिक के पिता संजय किराना की दुकान चलाकर परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। कार्तिक तीन बहन-भाइयों में दूसरे नंबर पर है। उन्होंने बताया कि तीन बच्चे पढ़ाई में बेहद होनहार हैं। कार्तिक ने 10वीं तक की शिक्षा शहर के सत्यम स्कूल और 12वीं कक्षा हिंदू विद्यापीठ से पास की।
कार्तिक ने दीनबंधु छोटूराम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीसीआरयूएसटी), मुरथल से बीटेक की। उन्होंने बताया कि कार्तिक जीवन में अपने लिए अलग मुकाम बनाना चाहता था, इसके लिए सदैव मेहनत करता रहा। उसने जो सोचा था, उसे सच कर दिखाया है। बेटे की उपलब्धि से पूरे परिवार में खुशी का माहौल है।
गुरु के मार्गदर्शन पर निर्धारित किया लक्ष्य
मुरथल निवासी कार्तिक ने बताया कि डीसीआरयूएसटी में बीटेक करते समय गुरु प्रो. आरएस भारद्वाज ने लक्ष्य निर्धारित करने के लिए कहा। उन्होंने बताया कि इंडियन इंजीनियरिंग सर्विस (आईईएस) में युवाओं का भविष्य उज्ज्वल है। इस क्षेत्र में युवाओं को बहुत कुछ करने का मौका मिलता है। गुरु के मार्गदर्शन में बीटेक करते हुए ही अपना लक्ष्य निर्धारित कर लिया था। जिसे पाने के लिए निरंतर प्रयास करता रहा।
दूसरे प्रयास में मिली सफलता
कार्तिक ने बताया कि बीटेक करने के बाद मैंने एक साल तक दिल्ली में प्रशिक्षण (कोचिंग) लिया। उस समय संघ लोक सेवा आयोग की आईईएस की परीक्षा दी, लेकिन सफलता नहीं मिली। उसके बावजूद हार नहीं मानी। कोरोना काल में घर पर रहकर ही तैयारी करता रहा और दोबारा आवेदन किया।
कार्तिक ने बताया कि गत वर्ष 18 जुलाई को प्री और 21 नवंबर को मेन की परीक्षा हुई। इस वर्ष 28 फरवरी से 17 मार्च तक साक्षात्कार चले। जिसका परिणाम 28 मार्च को घोषित किया गया। मुझे ऑल इंडिया में 33वीं रैंक मिली है। कार्तिक कहते हैं कि अगर लक्ष्य निर्धारित कर उसे पाने के लिए मेहनत की जाए तो हर मंजिल आसान हो जाती है।