एप डाउनलोड करने के बाद लोगों को जीपीएस ऑन कर खस्ताहाल सड़क की फोटो खींचकर शिकायत करनी होती थी। एप में जियो टैगिंग के जरिए सड़क का खस्ताहाल हिस्सा टैग किया जा सकता था। शिकायत अपलोड करने से ही केवल खस्ताहाल सड़कों ही नहीं, बल्कि गलियों, नालों-नालियों की समस्याएं इस एप के जरिए अधिकारियों तक पहुंचती थी। जहां से शिकायत की जाती, एप वहां की लोकेशन स्वयं उठाता था। इसके बाद अधिकारी लोगों की समस्या का समाधान करवाते थे। एप में शिकायत नंबर भी दर्ज होता था।
लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को हरपथ एप के जरिए मई से दिसंबर 2022 तक सड़कों से जुड़ी कुल 5183 शिकायत मिली थीं। इनमें से विभाग ने 4494 शिकायत का निवारण कर दिया था। 355 शिकायत अन्य विभाग की होने के कारण उन्हें रद्द कर दिया गया। 54 शिकायत अधूरी पड़ी हैं। बाकी पर काम चल रहा है, पर छह माह से विभाग के पास एप के जरिए कोई शिकायत नहीं पहुंची है।
सरकार ने सड़कों, गलियों, नालों-नालियों की समस्याओं का समाधान करवाने के लिए लोगों को कार्यालय के चक्कर न लगाने पड़े, इसलिए हरपथ एप को लॉन्च किया था। हरपथ एप में लोक निर्माण विभाग, नगर निगम, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण, शहरी स्थानीय निकाय, मार्केटिंग बोर्ड व एचएसआईआईडीसी को शामिल किया गया है। मानसून के दौरान सड़कों में हुए गड्ढों को भरवाने में हरपथ एप सहायक सिद्ध होता था, लेकिन एप पर 6 माह से कोई शिकायत नहीं पहुंची है।
लोक निर्माण विभाग को दिसंबर से हरपथ एप के जरिए कोई शिकायत नहीं मिली है। एप से जो शिकायत मिली थीं उनमें से अधिकतर का समाधान करवा दिया गया है। 355 शिकायतें विभाग की नहीं होने से उन्हें रद्द कर दिया गया है। कुछ शिकायतें का समाधान होना है। उनको भी जल्द हल कर दिया जाएगा। -रविन दत्ता, उपमंडल अभियंता, लोक निर्माण विभाग।