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दोस्ती के लिए फांसी के फंदे तक पहुंच गया हरीश

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खरखौदा के वार्ड-9 में तिहरे हत्याकांड को अंजाम देने वाले हरीश को सतेंद्र से दोस्ती ने फांसी के फंदे तक पहुंचा दिया है। दोस्त की बहन के पति, सास व ससुर की हत्या के मामले में फांसी की सजा पाने वाले हरीश ने झूठी शान की खातिर वारदात को अंजाम दिया था। उसने जेल से पैरोल पर आने के बाद यह साजिश रची थी। वह 12 से ज्यादा मामलों में नामजद रहा है, इनमें से कई में उसको सजा भी मिल चुकी है। उसने दोस्ती के लिए वारदात को अंजाम दिया था। इतना ही नहीं वह दोस्त की बहन सुशीला को अस्पताल में मारना चाहता था, लेकिन पुलिस सुरक्षा के कारण अंजाम नहीं दे सका।
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झज्जर जिले के गांव बिरधाना के सतेंद्र उर्फ मोनू और हसनपुर के हरीश की दोस्ती कई साल पहले हो गई थी। हरीश आपराधिक गिरोह के संपर्क में आने के बाद कई वारदात कर चुका था। वर्ष 2013 में जब सतेंद्र की बहन सुशीला ने खरखौदा में रहने वाले अनुसूचित जाति के युवक प्रदीप से प्रेम विवाह किया था तो वह जेल में था। सतेंद्र ने उसको जेल में मिलकर बहन के प्रेम विवाह करने की जानकारी दी थी। तब हरीश ने उसको साजिश के तहत अपनी बहन सुशीला व उसके प्रेमी प्रदीप व उसके परिवार से संबंध सामान्य करने की सलाह दी थी। हरीश वर्ष 2016 में जेल से पैरोल पर आया। उसने पैरोल के दौरान ही प्रदीप के परिवार को खत्म करने की साजिश रची थी। उसके बाद इस वारदात को अंजाम दिया था।
सुशीला व देवर के बचने के बारे में हरीश को दो दिन बाद चला पता
हरीश व सतेंद्र ने वारदात के दौरान ताबड़तोड़ गोलियां चलाई थीं। उन्हें लगा था कि उन्होंने पूरे परिवार को खत्म कर दिया था। वह वारदात कर भाग गए थे। दो दिन बाद हरीश को जानकारी मिली थी कि परिवार में से सतेंद्र की बहन सुशीला और उसका देवर सूरज बच गए हैं। वे अस्पताल में भर्ती हैं। तब उन्होंने सुशीला को अस्पताल में ही मारने की भी तैयारी की थी, लेकिन पुलिस के सख्त पहरे के चलते वह वारदात को अंजाम नहीं दे सके थे।
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वारदात से करीब साढ़े तीन साल पहले सुशीला ने प्रदीप से किया था प्रेम विवाह
झज्जर के गांव दिसौरखेड़ी के सुरेश का परिवार वारदात से करीब 17 वर्ष पहले खरखौदा के बरोणा मार्ग पर वार्ड-9 में रहने लगा था। बड़े बेटे प्रदीप (27) का महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान बिरधाना, झज्जर निवासी सुशीला के साथ प्रेम प्रसंग हुआ था और वारदात से साढ़े तीन साल पहले प्रेम विवाह हुआ था, जिससे प्रदीप की एक बेटी प्रिया है।
हमले में बच गई थी प्रदीप की बेटी और बहन
वारदात के समय प्रदीप की करीब ढाई साल की बेटी प्रिया जहां उनके साथ ही सो रही थी, वहीं उसकी बहन ललिता अपने ताऊ के घर सो रही थी। इसके चलते परिवार के सात सदस्यों में से बुआ-भतीजी इस हमले में बच गई थीं।
सुशीला ने दिया था बेटे को जन्म
हमले में घायल सुशीला नौ माह की गर्भवती थी। कमर में गोली लगने से घायल सुशीला के गर्भ में पल रहे बच्चे को भी खतरा पैदा हो गया था, जिसके बाद पीजीआई रोहतक में सुशीला की डिलिवरी करवाई गई थी। सुशील ने बेटे को जन्म दिया था।
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