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देरी किए बिना किसानों पर दर्ज मामले वापस ले सरकार : एसकेएम

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कुंडली बॉर्डर पर हाथों में झंडे लेकर पहुंचे किसान। संवाद - फोटो : Sonipat
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सोनीपत। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने कहा कि किसानों पर आंदोलन के दौरान दर्ज किए फर्जी मुकदमे वापस लेने में देरी नहीं होनी चाहिए। साथ ही कहा कि दर्ज मुकदमे वापस लेने व शहीदों को मुआवजा देने के संबंध में हरियाणा एसकेएम की प्रदेश की मनोहर लाल सरकार के साथ 3 दिसंबर को हुई पहले दौर की बातचीत से इस मामले में कुछ प्रगति हुई है। मगर सरकार बैठकों या बातचीत में समय न गवां कर अब बिना देरी किए मामलों को वापस लेकर इसका पटाक्षेप करे। बाकी मांगों को लेकर सरकार को एसकेएम द्वारा गठित 5 सदस्यीय कमेटी से बातचीत करनी चाहिए।
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एसकेएम समन्वय समिति के सदस्य डॉ. दर्शन पाल ने रविवार को कहा कि आंदोलन के दौरान हरियाणा में 48 हजार किसानों पर मामले दर्ज किए जा चुके हैं। एसकेएम की नजर में यह मुकदमे फर्जी हैं। सरकार चाहती है कि आंदोलन वापस हो तो उसे ये मामले तुरंत वापस लेने होंगे। इस संबंध में 3 दिसंबर को हरियाणा संयुक्त किसान मोर्चा की हरियाणा सरकार से बातचीत हुई थी। मगर बातचीत से बात आगे नहीं बढ़ेगी बल्कि सरकार को तुरंत मामले वापस लेने चाहिए। तभी जाकर किसान आंदोलन वापसी की दिशा में सोचेंगे।
किसान नेता ने कहा कि 21 नवंबर को प्रधानमंत्री को लिखे गए पत्र में उठाए गए मुद्दों पर सरकार को बातचीत करने के लिए बिना देरी के आगे आना चाहिए। एसकेएम ने कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के बयान को संज्ञान में लिया, जहां उन्होंने विरोध कर रहे किसानों से आंदोलन समाप्त कर वापस जाने की अपील की है। एसकेएम नेता ने कहा कि वह नरेंद्र तोमर को याद दिलाना चाहते हैं कि कई मुद्दे अभी भी लंबित हैं और उन्हें 21 नवंबर को एसकेएम द्वारा प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में स्पष्ट रूप से सूचीबद्ध किया गया है। सरकार को इन लंबित मुद्दों पर 5 सदस्यीय समिति के साथ चर्चा करनी चाहिए जो इस उद्देश्य के लिए गठित की गई है। संयुक्त किसान मोर्चा ने उम्मीद जताई है कि 7 दिसंबर से पहले केंद्र सरकार बातचीत कर बाकी सभी मुद्दों का समाधान करेगी।
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