सोनीपत में आयोजित बैठक में उपस्थित किसान।
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इफ्को के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक डॉ. अशोक कुमार ने कहा कि किसान अब नई तकनीक का लाभ उठाकर लागत में कमी करने के साथ ही ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं। किसानों को एक सप्ताह बाद नैनो यूरिया की बोतल उपलब्ध हो जाएगी। एक बोरा यूरिया का काम अब 500 एमएल (मिलीलीटर) की नैनो यूरिया की तरल बोतल करेगी। इससे पर्यावरण को नुकसान कम होगा।
वे शुक्रवार को कृषि विज्ञान केंद्र में किसान गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि विश्व के पहले नैनो तरल यूरिया का आरंभ इफ्को ने किया है। एक बोतल 45 किलोग्राम यूरिया के बराबर कारगर है। सामान्य यूरिया उर्वरक मात्र 30 प्रतिशत ही फसल द्वारा अवशोषित किया जाता है। बाकी यूरिया जल एवं मृदा प्रदूषण का कारण बनता है। यह नैनो यूरिया उत्पाद 80 प्रतिशत तक दक्षता रखता है। यह संपूर्ण रूप से फसल के बढ़वार में उपयोगी है। इसका उपयोग सभी प्रकार की फसलों में छिड़काव (स्प्रे) के द्वारा किया जा सकता है। 2-4 मिलीलीटर नैनो यूरिया को प्रति लीटर पानी में मिलाकर घोल बनाकर छिड़काव किया जाएगा। यह 240 रुपये प्रति बोतल में उपलब्ध होगी। इस दौरान वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. बामल, डॉ. संदीप, डॉ. कुलदीप, डॉ. विवेक, सुशील कुमार, मंजीत मौजूद रहे।