महाविद्यालयों में दाखिले के लिए चल रही फीस जमा करवाने की प्रक्रिया अंतिम दिन भी सुस्त रही। पहली कट ऑफ में शामिल विद्यार्थियों ने फीस जमा करवाने की अंतिम तिथि होने के बावजूद दाखिला सुनिश्चित करवाने में रुचि नहीं दिखाई। परिणाम स्वरूप पहली लिस्ट में शामिल करीब 20 फीसदी विद्यार्थी दाखिले से वंचित रह गए। महाविद्यालय प्रबंधन की माने तो अब इन विद्यार्थियों का नाम दूसरी कट ऑफ में भी नहीं आएगा। इन विद्यार्थियों को अब दाखिले के लिए ओपन काउंसिलिंग का इंतजार करना होगा।
उच्चतर शिक्षा निदेशालय ने महाविद्यालय मेें दाखिला प्रक्रिया के लिए 16 अगस्त को पोर्टल खोला था, जिसके बाद ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हुई। ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तिथि को तीन बार बढ़ाया गया। 12 सितंबर को पहली संशोधित कट ऑफ जारी की गई। पहली कट ऑफ में स्थान बनाने वाले विद्यार्थियों को दाखिल सुनिश्चित करवाने के लिए 15 सितंबर तक फीस जमा करवानी थी। उच्चतर शिक्षा निदेशालय ने फीस जमा करवाने की अंतिम तिथि को पहले 18 सितंबर फिर 20 सितंबर तक बढ़ाया। इसके बावजूद विद्यार्थियों ने फीस जमा करवाने में रुचि नहीं दिखाई।
कल लगेगी दूसरी कट ऑफ
महाविद्यालयों में दूसरी कट ऑफ 22 सितंबर को लगेगी। पहली कट ऑफ में स्थान बनाने से वंचित रहे विद्यार्थी दूसरी कट ऑफ का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। महाविद्यालय प्रबंधन की माने तो जिन विद्यार्थियों ने पहली कट ऑफ में नाम आने के बाद भी दाखिला नहीं लिया है, उनका नाम दूसरी कट ऑफ में शामिल नहीं किया जाएगा। दूसरी कट ऑफ के बाद सीटें रिक्त रहती हैं तो दाखिला पोर्टल दोबारा खोला जाएगा। उस स्थिति में विद्यार्थी दोबारा आवेदन कर सकेंगे।
20 फीसदी विद्यार्थियों ने जमा नहीं करवाई फीस
पहली मेरिट लिस्ट में स्थान बनाने वाले विद्यार्थियों को अपना दाखिला सुनिश्चित करने के लिए 20 सितंबर सायं 5 बजे तक फीस जमा करवाने का समय दिया गया था। अंतिम दिन सभी महाविद्यालयों में फीस जमा करवाने वाले विद्यार्थियों की संख्या 20 से 25 तक ही सीमित रही। फीस जमा करवाने वालों में कला संकाय के विद्यार्थियों की संख्या अधिक रही। अंतिम तिथि तक हिंदी महाविद्यालय में करीब 300, हिंदू कन्या महाविद्यालय में 400, सीआरए महाविद्यालय में 291 विद्यार्थियों ने ही दाखिला सुनिश्चित करवाया, जबकि मेरिट लिस्ट में 500 से अधिक विद्यार्थियों के नाम शामिल थे, जिले के अन्य महाविद्यालयों में भी यही स्थिति रही।
वर्जन
पहली कट ऑफ में स्थान बनाने के बावजूद काफी विद्यार्थियों ने दाखिला नहीं लिया है। इसका मूल कारण दिल्ली विश्वविद्यालय सहित अन्य विश्वविद्यालयों की मेरिट लिस्ट जारी न होना है। विद्यार्थियों ने दूसरे विश्वविद्यालयों में भी आवेदन किया हुआ है। उन्हें उम्मीद है कि वहां उनका दाखिला हो जाएगा, अगर नहीं होता है तो वे महाविद्यालय में ओपन काउंसिलिंग के दौरान दाखिला ले लेंगे। यही कारण है कि फीस जमा करवाने में विद्यार्थियों ने रुचि नहीं दिखाई।
- डॉ. बीके गर्ग, प्राचार्य, हिंदू महाविद्यालय, सोनीपत