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Sonipat News: पांडव नगरी में मां के जयघोष की गूंज, नवरात्र के प्रथम दिन शैलपुत्री का हुआ पूजन

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सोनीपत। शारदीय नवरात्र के पहले दिन पांडव नगरी में मां के जयघोष की गूंज रही। नवरात्र के पहले दिन श्रद्धालुओं ने विधिविधान से मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की। मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की काफी भीड़ रही। शाम को भी मंदिरों में मां दुर्गा की आराधना के लिए श्रद्धालुओं का आवागमन लगा रहा। श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना कर घर-परिवार व समाज में सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की। घरों में शुभ मुहूर्त पर कलश स्थापित कर श्रद्धालुओं ने व्रत धारण किया।
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सब्जी मंडी के पास कामी रोड स्थित सिद्धपीठ श्री बाबा धाम मंदिर के संचालक राकेश कुच्छल व मुख्य पुजारी पंडित श्रीनाथ ने बताया कि नवरात्र के प्रथम दिन श्रद्धालुओं ने माता शैलपुत्री का पूजन किया। द्वितीय नवरात्र को मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाएगी। ब्रह्मचारिणी मां दुर्गा का दूसरा स्वरूप है। मां ने इस रूप में भगवान शंकर को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। कठिन तपस्या के कारण इन्हें ब्रह्मचारिणी के नाम से जाना जाता है। ब्रह्मचारिणी देवी का स्वरूप पूर्ण ज्योतिर्मय एवं अत्यंत भव्य है। इनके दाहिने हाथ में जप की माला व बाए हाथ में कमंडल है। मां दुर्गा का यह स्वरूप श्रद्धालुओं को अनंत फल प्रदान करने वाला है। मां ब्रह्मचारिणी की आराधना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम की वृद्धि होती है। श्रद्धालुओं को सर्वत्र सिद्धि व विजय की प्राप्ति होती है।
वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा सिद्धपीठ बाबा धाम मंदिर
पंडित श्रीनाथ ने बताया कि करीब 80 वर्ष पहले यहां कुच्छल परिवार का पितृ स्थल हुआ करता था। साथ में मां दुर्गा का मंदिर बनाया गया था। भक्तों की आस्था को देखते हुए वर्ष 2006 में मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया गया। मां वैष्णो देवी की गुफा के निर्माण के साथ भगवान जगन्नाथ दरबार सहित मंदिर को विशाल रूप दिया गया। समय के साथ आज भारतवर्ष में श्रद्धालुओं की मंदिर के प्रति आस्था जुड़ी है। मां दुर्गा व भगवान जगन्नाथ की अनुकंपा है कि देशभर के अलावा विदेशों से भी श्रद्धालु यहां आकर नतमस्तक हो रहे हैं। जुलाई माह में यहां भव्य रूप से भगवान जगन्नाथ महोत्सव भी मनाया जाता है।
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