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लखीमपुर खीरी हत्याकांड के आरोपियों का वित्त मंत्री की तरफ से बचाव दुर्भाग्यपूर्ण : एसकेएम

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संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की तरफ से लखीमपुर खीरी हत्याकांड की निंदा करने के बाद मामले में मंत्री और अन्य आरोपियों का बचाव करने की कोशिश दुर्भाग्यपूर्ण है। भाजपा और वरिष्ठ मंत्री इस तरह केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी का बचाव कर न्याय की उम्मीद को कम कर रहे हैं।
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संयुक्त किसान मोर्चा समन्वय समिति के सदस्य डॉ. दर्शन पाल ने कहा कि केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण पहली मंत्री हैं, जिन्होंने लखीमपुर खीरी नरसंहार के बारे में कुछ कहा है। हालांकि यह बयान उन्हें हार्वर्ड विवि में एक सवाल के जवाब में देना पड़ा था। उन्होंने इसे निंदनीय हिंसा कहा, लेकिन बड़े अजीब तरह से मंत्री और अन्य आरोपियों का बचाव करने की मनघड़ंत कोशिश की। उनके इस तरह बचाव करने से न्याय की उम्मीद को झटका लगा है। एसकेएम नेता ने कहा कि केंद्रीय मंत्री भी उसी झूठ को फैलाने की कोशिश कर रही हैं, जिसे मोदी सरकार जबरदस्ती सबके सामने रख रही है। उनका कहना कि किसानों ने किसान विरोधी तीनों कानूनों के बारे में कोई विशेष आपत्ति और स्पष्टीकरण नहीं दिया है। यह सही नहीं। उन्होंने कहा कि किसानों ने तीनों कृषि कानूनों पर अपनी मूल आपत्तियों को स्पष्ट और प्रभावी तरीके से बताया है। यह भी समझाया है कि केवल संशोधनों या एक समय अवधि के लिए निलंबन द्वारा बाजारों के गहन समस्याग्रस्त अविनियमन का समाधान नहीं होगा। इसके अलावा, मंडियों के बंद होने या किसानों की आय में भारी गिरावट के बारे में सामने आए आधिकारिक आंकड़ों के साथ यह तथ्य भी सामने आया है कि किसानों के लिए पहले से ही अनुचित एमएसपी की घोषणा की गई है, जिससे वे बहुत कम कीमत प्राप्त कर पा रहे हैं। एसकेएम ने केंद्रीय मंत्री सीतारमण से अन्य मंत्रियों की तरह ही झूठी कहानी फैलाने के बजाय तथ्यों के बारे में अवगत होने का आग्रह किया है।
देशभर के लिए कलश यात्राएं रवाना
एसकेएम ने कहा कि तिकुनिया में प्रार्थना सभा के बाद शहीद कलश यात्राएं उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के अलावा भारत के विभिन्न हिस्सों के लिए रवाना हुईं। जिन स्थानों पर कलश यात्रा पहुंची हैं, वहां पर श्रद्धांजलि देने के लिए किसानों की भीड़ लग रही है।
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तमिलनाडु से कुंडली बॉर्डर पहुंचे सीटू से जुड़े कर्मचारी
तमिलनाडु में सीटू से जुड़े करीब 500 परिवहन कर्मचारी एकजुटता के साथ किसान आंदोलन में शामिल होने और आंदोलन को मजबूत करने के लिए कुंडली मोर्चा स्थल पर पहुंचे। देश के दूर-दराज के हिस्सों में (दिल्ली से दूर) किसान आंदोलन की सक्रिय भागीदारी और प्रसार ने भाजपा व आरएसएस के लोगों के बयानों पर विराम लगा दिया कि आंदोलन केवल एक या दो राज्यों यानी पंजाब और हरियाणा तक सीमित है।
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