अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश आरपी गोयल की अदालत ने झूठी शान के लिए परिवार के तीन लोगों की हत्या के दोषी को फांसी की सजा सुनाई है। दोषी ने युवती के भाई के साथ मिलकर उसके पति, सास-ससुर की हत्या करने के साथ ही युवती व उसके देवर को भी गोली मार दी थी। न्यायाधीश ने इस मामले को दुर्लभतम करार देते हुए समाज में जातिगत वैमनस्य बढ़ाने वाली घटना बताया है। फांसी की सजा पाने वाले हरीश को जेल भेज दिया गया है। वहीं फरार दोषी सतेंद्र उर्फ मोनू को सजा उसकी गिरफ्तारी के बाद सुनाई जाएगी।
बरोणा रोड खरखौदा के सूरज ने 19 नवंबर, 2016 को पुलिस को बताया था कि उसके बड़े भाई प्रदीप ने झज्जर के बिरधान की रहने वाली सुशीला से तीन साल पहले प्रेम विवाह किया था। वह 18 नवंबर 2016 की रात को परिवार के साथ घर पर सो रहे थे। रात में करीब दस बजे कार में सवार होकर दो युवकों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दी थी। गोली लगने से उसके भाई प्रदीप व मां सुनीता की मौके पर ही मौत हो गई थी। गोली लगने से सूरज, उसका पिता सुरेश और आरोपियों की बहन सुशीला गंभीर रूप से घायल हो गए थे। अस्पताल में उपचार के दौरान सुरेश ने भी दम तोड़ दिया था।
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घटना के समय सुशीला गर्भवती थी। गोली लगने से घायल होने पर उसको पीजीआई में भर्ती कराया गया था। वहीं पर रात को उसने बेटे को जन्म दिया था। घटना के आरोपी सतेंद्र उर्फ मोनू सुशीला का भाई व हरीश उसका दोस्त हैं। सतेंद्र उर्फ मोनू मामले में भगौड़ा हो गया था। वह जमानत पर था, उसके बाद से वह पकड़ में नहीं आ सका है। मामले में मंगलवार को एएसजे आरपी गोयल की अदालत ने दोषी हरीश को फांसी की सजा सुनाई है। मामले में फरार उसके साथी को गिरफ्तारी के बाद सजा सुनाई जाएगी।