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वसीका नवीस और स्टांप वेंडरों का लाइसेंस 50 को, चल रहे थे 100 से ज्यादा, हटवाए

Sat, 23 Jan 2016 12:16 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सोनीपत
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लंबे समय से अधिकारियों की नाक के नीचे लघुसचिवालय के सामने बिना लाइसेंस के वसीका नवीस और स्टांप वेंडरों के खोखे चल रहे थे। अचानक प्रशासन को होश आया और एसडीएम निशांत यादव के नेतृत्व में जेसीबी से 60 खोखे हटवाए गए। हालांकि जब प्रशासन की टीम वकीलों की कैंटीन की तरफ बढ़ी तो विरोध के चलते लौटना पड़ा। एसडीएम का कहना है कि लाइसेंस धारक खोखे वालों की सूची तैयार की जा रही है। उन्हें नियमों के तहत काम करने की अनुमति दी जाएगी और खाली जमीन का सौंदर्यीकरण किया जाएगा।
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प्रशासन के मुताबिक लघु सचिवालय परिसर में बहुत से वसीका नवीसों, स्टैंप वेंडरों, नोटरी और फोटोस्टेट का काम करने वाले लोगों ने खोखे लगाकर अतिक्रमण कर रखा था। लघु सचिवालय परिसर में लंबे समय से चल रहे इस काम को प्रशासन बंद कराने में हिचक रहा था। शुक्रवार दोपहर अचानक एसडीएम के नेतृत्व में प्रशासनिक अमला अतिक्रमण हटाने से पूर्व सभी तरह की औपचारिकताएं पूरी करके मौके पर पहुंचा। बाकायदा नोटिस देकर आपत्तियां भी आमंत्रित की गईं। इसके बाद 100 में से 60 खोखों को हटा दिया गया। करीब चार घंटे तक अतिक्रमण हटाने का काम चला। साथ ही चेतावनी दी कि अवैध रूप से खोखे रखने पर कार्रवाई होगी। वहीं जब दस्ता कोर्ट परिसर के साथ लगी कैंटीन में पहुंचा तो वकील विरोध में उतर आए। बार एसोसिएशन के प्रधान अनूप सिंह दहिया के नेतृत्व में वकीलों ने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध किया। वकीलों के विरोध के चलते प्रशासन ने कैंटीन को नहीं हटाया। इस दौरान डीएसपी मुकेश कुमार, सिटी थाना प्रभारी प्रवीण कुमार और जिला प्रशासन के अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

वकीलों के आगे एक न चली प्रशासन की, सूची के आधार पर हटाया अतिक्रमण
अतिक्रमण हटाने से पहले जिला प्रशासन ने लाइसेंस वाले वसीकानवीसों और स्टांप वेंडरों आदि की एक सूची तैयार की थी। एसडीएम ने स्वयं एक-एक करके अपने सामने ही अवैध अतिक्रमण हटवाया। साथ ही उन्होंने कहा कि नियमानुसार लाइसेंसधारक वसीकानवीस 10 बाई 10 भूक्षेत्र में ही अपना खोखा लगा सकते हैं और टाइपिस्ट को केवल कुर्सी और मेज लगाने की ही अनुमति दी जाती है।  
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50 लोगों के हैं लाइसेंस
लघु सचिवालय परिसर में वसीका नवीसों, स्टांप वेंडरों, नोटरी, फोटोस्टेट और खान-पान की दुकानों के लिए लाइसेंस दिए जाते हैं। फिलहाल 50 लोगों के पास इसके लिए लाइसेंस हैं। जिनका हर वर्ष नवीनीकरण भी होता है। तहसील कार्यालय के अनुसार भीमसेन आर्या, राजेंद्र प्रसाद भारद्वाज, संतोष कुमार, राजेश मलिक, ज्ञानचंद कपूर, रवि कपूर, रामरतन, नानक चंद नारंग, अनिल तनेजा, वीरेंद्र कुमार बत्रा, महावीर प्रसाद जैन, रण सिंह राठी, वेद प्रकाश सैनी, रमेश आर्या, प्रवींद्र कुमार, ओम प्रकाश, बिजेंद्र कुमार, सुरेश कुमार वर्मा को डीड राइटर का लाइसेंस जारी किया गया है। जिनकी संख्या 18 है। तहसील में चार स्टांप वेंडर पुरानी तहसील में बैठते थे। जो अब भी नियमित रूप से बैठ रहे हैं। इसमें सत नारायण वर्मा, समुंदर सिंह, नरेंद्र कुमार और उमेश बत्रा शामिल हैं। हालांकि इनके अलावा 20 और लोगों को स्टांप वेंडर का लाइसेंस जारी किया गया है, लेकिन इनमें से चार-पांच ही बैठते।

अधिकारियों ने माना, पब्लिक के साथ हुआ धोखा
एसडीएम निशांत यादव ने कहा कि जिनके पास लाइसेंस होता है, उनका एक नंबर होता है। वे जो भी कागजात तैयार करते हैं, उन पर लाइसेंस का नंबर भी लिखा जाता है। हालांकि जो लोग अवैध रूप से यहां खोखे लगाकर काम कर रहे थे, उनके द्वारा तैयार किए गए  कागजातों की कोई प्रमाणिकता नहीं होती। इस प्रकार से ऐसे लोग जनता के साथ भी धोखा कर रहे थे।
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