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Sirsa News: श्री राम ने तोड़ा शिव धनुष तो देवी सीता ने डाली वरमाला

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कथावाचन करते शास्त्री जयदेव दाधीच।
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ओढां। गांव पन्नीवाला मोटा की श्री कृष्ण गोशाला में श्रीराम कथा चल रही है। कथा के 5वें दिन रविवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा सुनने के लिए पहुंचे। कथावाचक शास्त्री जयदेव दाधीच ने श्रद्धालुओं को सीता स्वयंवर का प्रसंग सुनाया।
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कथावाचक ने बताया कि जनकपुरी के राजा जनक ने अपनी पुत्री सीता के विवाह के लिए स्वयंवर रखा। इस स्वयंवर के लिए सभी राजा-महाराजा व योद्धाओं को निमंत्रण भेजा गया। इस स्वयंवर में ऋषि विश्वामित्र भी श्री राम व लक्ष्मण को साथ लेकर पहुंचे। स्वयंवर में शर्त रखी गई कि जो भी कोई सभा में रखे शिव धनुष को उठाकर उस पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा, सीता का विवाह उसी से ही होगा। सभा में मौजूद बड़े-बड़े राजा-महाराजाओं व योद्धाओं ने कोशिश की, लेकिन कोई भी धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाना तो दूर उसे हिला तक नहीं पाया।
ये देखकर महाराज जनक दुखी हो गए कि क्या उनकी पुत्री के लायक इस धरती पर कोई नहीं। फिर ऋषि विश्वामित्र की आज्ञा पाकर श्री राम धनुष की ओर बढ़े तो सभी ने उपहास उड़ाया कि जब इतने बड़े योद्धा भी इस धनुष को हिला नहीं पाए तो ये साधारण सा राजकुमार क्या कर पाएगा। श्री राम ऋषि विश्वामित्र का आशीर्वाद लेकर शिव धनुष को आसानी से उठा लिया। श्रीराम जब धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने लगे तो धनुष टूट गया। ये दृश्य देखकर सब हैरान रह गए। इसके बाद जब माता सीता ने श्रीराम के गले में वरमाला डाली तो आकाश से देवी-देवताओं ने भी पुष्पवर्षा की। इस दौरान पंडाल भी जय सियाराम के जयघोष से गूंज उठा।
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कथावाचक जयदेव दाधीच ने सुनाया कि शिव धनुष टूटा तो आकाश में भयंकर गरजना हुई। शिव धनुष के टूटने से क्रोधित होकर परशुराम राज सभा में पहुंचे और क्रोधित होते हुए श्रीराम को युद्ध के लिए चुनौती दी। लक्ष्मण द्वारा प्रति उत्तर देने पर परशुराम और अधिक क्रोधित हो गए। श्रीराम ने उनका क्रोध शांत किया। जब परशुराम को श्रीराम के वास्तविक रूप का आभास हुआ तो वे अपने दिव्यास्त्र श्रीराम को भेंट कर महेन्द्र पर्वत पर तप के लिए चले गए।
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