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जांच में 10 स्कूलों के पानी के सैंपल मिले फेल, 26 की रिपोर्ट लंबित

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स्कूलों से पेयजल के सैंपल लेते जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. हरसिमरण सिंह - फोटो : Sirsa
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सिरसा। जिले के स्कूलों में पीने का पानी भी सुरक्षित नहीं है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्कूलों से लिए गए सैंपलों की जब जांच की गई तो 10 स्कूल ऐसे निकले जहां के पानी में खतरनाक बैक्टीरिया है। इनके प्रभाव से उल्टी, दस्त सहित चमड़ी और अन्य पेट संबंधी रोग होने का खतरा है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने संबंधित 10 स्कूलों को नोटिस जारी कर दिया है। इसके अलावा डीसी और जिला शिक्षा अधिकारी को भी पत्र लिखकर स्थिति से अवगत करवा दिया है।
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जिले के प्राइवेट और सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों द्वारा पीने के लिए उपयोग में लाया जाने वाले आरओ युक्त पानी के सैंपल भी अब फेल आए है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले के प्राइवेट और सरकारी के करीब 50 स्कूलों से सैंपल लिए गए थे। इनमें से 24 स्कूलों के सैंपलों की रिपोर्ट आई है। जिनमें से फिलहाल 10 स्कूलों के पानी में कॉलिफोर्म बैक्टीरिया पाया गया है। यह बैक्टीरिया विद्यार्थियों के स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। कॉलिफोर्म बैक्टीरिया पाए जाने वाले दस स्कूलों में से नौ स्कूल सरकारी और एक प्राइवेट है। फिलहाल 26 स्कूलों की रिपोर्ट अभी पेंडिंग है। जिनकी इस सप्ताह में रिपोर्ट आने की संभावना है। इससे पहले स्वास्थ्य विभाग की ओर शहर के तीन आरओ प्लांट से पानी के सैंपल लिए गए थे। उनमें भी कॉलिफोर्म बैक्टीरिया पाया गया था।
जिले के इन स्कूलों के पेयजल में पाया गया कॉलिफोर्म बैक्टीरिया
नंबर स्कूल के नाम
1. राजकीय स्कूल नकोड़ा
2. राजकीय स्कूल संतनगर
3. राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल रानियां
4. राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल महावीर दल सिरसा
5. राजकीय कन्या माध्यमिक व प्राथमिक विद्यालय गुरुनानक नगर सिरसा
6. राजकीय मॉडल स्कूल भंबूर
7. राजकीय प्राथमिक स्कूल भंबूर
8. राजकीय मॉडल स्कूल केसूपुरा
9. गुरुनानक हाई स्कूल सुरतिया
10. राजकीय हाई स्कूल सुरतिया
उपायुक्त और जिला शिक्षा अधिकारी को लिखा पत्र
स्कूलों के सैंपल फेल आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से उपायुक्त अनीश यादव और जिला शिक्षा अधिकारी संत कुमार को स्कूल संचालकों पर कार्रवाई के लिए पत्र लिखा है। ताकि स्कूलों में पानी की स्थिति में सुधार किया जा सके। विभाग की टीम ने कॉलिफोर्म बैक्टीरिया को खत्म करने के लिए पानी की टंकी में क्लोरिन का छिड़काव किए जाने का स्कूल संचालकों को प्रशिक्षण भी दिया है। ताकि इसके बाद से विद्यार्थियों को दिया जाने वाला पानी दूषित न हो।
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स्वास्थ्य विभाग के पास पहुंची क्लोरिन की एक लाख गोलियां
स्वास्थ्य विभाग के पास मुख्यालय से अब एक लाख क्लोरिन की गोलियां भी पहुंची है। जोकि विभाग की ओर से घरों और सरकारी संस्थानों में पानी के टंकी अनुसार वितरित की जा रही है। क्लोरिन की एक गोली 25 लीटर पानी में डाली जाती है। विभाग की ओर से टंकी अनुसार गोलियों की डिब्बे वितरित किए जा रहे हैं। ताकि पाइपों से पहुंचने वाला बैक्टीरिया युक्त पानी के टंकी में पहुंचने के बाद वह शुद्ध हो सके और पानी से बैक्टीरिया खत्म हो सके।
बैक्टीरिया से पेट संबंधित होती है गंभीर बीमारियां
साफ पानी में दूषित पानी मिक्स होने के कारण कॉलिफोर्म बैक्टीरिया पानी में पनपता है। जिसके कारण पेट और दांतों संबंधित गंभीर बीमारियां होने का डर रहता है। बैक्टीरिया से दस्त, उल्टी, त्वचा, दांत खराब होने व अन्य कई तरह की बीमारियां लगती है। इससे बचाव के लिए पानी को गुनगुना करके पीएं। अगर फिर बी इस तरह की कोई भी बीमारी होती है तो डॉक्टर से जांच करवाएं।
स्कूलों के पानी के सैंपल फेल आने के बाद संचालकों को नोटिस जारी किया गया। उपायुक्त और जिला शिक्षा अधिकारी को रिपोर्ट के अनुसार पत्र लिखा गया है ताकि उचित कार्रवाई की जा सके। बैक्टीरिया खत्म करने के लिए क्लोरिन की दवाई का छिड़काव करने संबंधित दवाई और गोलियां भी वितरित की जा रही है।
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-डॉ. रोहताश कुमार, सिविल सर्जन, सिरसा।
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