अध्यापकों के ट्रांसफर करवाए जाने के बाद बडागुढ़ा सिरसा रोड पर धरना देकर बैठे विद्यार्थी और उनके ?
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बडागुढ़ा। अध्यापकों की ट्रांसफर ड्राइव से लोगों में रोष का माहौल है। गांव छतरियां में ग्रामीणों ने विद्यार्थियों के साथ मिलकर सरकारी स्कूल को ताला जड़कर रोड जाम कर दी। ग्रामीणों ने कहा कि नया स्टाफ न आने तक पुराने स्टाफ को रिलीव नहीं किया जाएगा। इस दौरान नौजवान भारत सभा के सदस्यों ने भी उपस्थिति रहकर ग्रामीणों की आवाज बुलंद की।
ग्रामीण सुबह स्कूल खुलते ही मुख्य द्वार पर पहुंच गए। इसके बाद विद्यार्थी ने भी कक्षाओं का बहिष्कार कर दिया और ग्रामीणों ने स्कूल में मुख्य द्वार पर ताला लगाकर रोड पर आ गए। ग्रामीणों ने बडागुढ़ा से सिरसा जाने वाले मार्ग को ट्रैक्टर-ट्रालियां लगाकर जाम कर दिया। ग्रामीणों ने कहा कि सरकारी स्कूलों में वैसे ही अध्यापकों की कमी है। अब ऊपर से सरकार ने ट्रांसफर ड्राइव के नाम पर अध्यापकों के तबादले एवं स्कूलों में अध्यापकों की पोस्टों को कैप्ट करना शुरू कर दिया। इसके चलते विद्यार्थियों की शिक्षा प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि सरकार एक तरफ तो बेटी पढ़ाओ का नारा दे रही है और दूसरी तरफ बेटियों से शिक्षा छीनने का काम किया जा रहा है। वहीं सूचना मिलने के बाद बडागुढ़ा पुलिस मौके पर पहुंची। जिला शिक्षा अधिकारी ने बडागुढ़ा स्कूल के प्रिंसिपल बलदेव सिंह को ग्रामीणों के बीच भिजवाया, लेकिन ग्रामीणों ने प्रिंसिपल की एक न सुनते हुए उसे लौटा दिया। ग्रामीणों ने करीब पांच घंटे उपरांत रोड खोल दिया और स्कूल में आकर धरने पर बैठ गए। ग्रामीणों ने स्कूल का ताला नहीं खोला, जिसके बाद स्टाफ लौट गया। उन्होंने कहा कि बुधवार से स्कूल के समक्ष रोजाना धरना लगाया जाएगा। उन्होंने कहा कि जब तक नया स्टाफ नहीं आ जाता पुराने अध्यापकों को रिलीव नहीं होने दिया जाएगा।
स्कूल में केवल तीन ही है अध्यापक
उन्होंने बताया कि गांव के सरकारी स्कूल में अध्यापकों के 11 पद स्वीकृत हैं। अब स्कूल में केवल तीन अध्यापक ही बचे हैं। ऐसे मेें उनके बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी। नौजवान भारत सभा के सदस्य कुलविंदर सिंह व वकील सिंह ने कहा कि सरकार शिक्षा का ढांचा खत्म करने पर तुली हुई है, ताकि बच्चे पढ़कर अपना हक न मांग सके। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में वैसे ही शिक्षा बुरी तरह से प्रभावित हुई और ऊपर से रही सही कसर सरकार पूरी कर रही है।