रानियां। पानी के रिसाव की जगह लगाए गए मिट्टी से भरे थैले। संवाद
रानियां। प्रदेश के उत्तर-पूर्वी जिलों व साथ लगते पंजाब और हिमाचल में हो रही लगातार बारिश के कारण घग्गर का जलस्तर दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। वर्तमान में ओटू झील अपनी क्षमता से अधिक भर चुकी है। स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए हेड से सभी गेट राजस्थान की ओर खोल दिए गए हैं। शुक्रवार को ओटू हेड से करीब 27 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया।
इससे गांव मस्तानगढ़ के पास तटबंध से पानी का रिसाव शुरू हो गया। गनीमत रही कि उस समय किसान मौके पर मौजूद थे। किसानों ने बताया कि यह रिसाव तटबंध से होकर गुज़र रही मोटर की पाइपलाइन की वजह से हुआ। स्थिति की जानकारी मिलते ही दर्जनों किसान थैले लेकर पहुंचे और करीब 100 से अधिक मिट्टी से भरे थैलों से रिसाव को रोक दिया।
किसानों के अनुसार शुक्रवार शाम तक तटबंधों के पास जलस्तर करीब 4 फीट बढ़ चुका था। इससे मस्तानगढ़, फिरोजाबाद, धमोड़ा थेड़ी, ओटू, धनूर, नकोड़ा समेत कई गांवों के लोगों को तटबंध टूटने और फसलें डूबने का खतरा सताने लगा है। लगातार बारिश के कारण जिलेभर में फसलों की सिंचाई प्रभावित हुई है। घग्गर धार से बाहर बरसाती पानी भर जाने से तटबंधों के पास धान और ज्वार की फसलें पूरी तरह डूब गई हैं। किसानों का कहना है कि सैकड़ों परिवारों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। बढ़ते जलस्तर को देखकर क्षेत्रवासियों को वर्ष 2010 जैसी बाढ़ की आशंका सताने लगी है।
क्षेत्रवासियों ने प्रशासन का जताया आभार
जिला प्रशासन ने ओटू हेड से राजस्थान की ओर दोनों तटबंधों पर जेसीबी मशीन, ट्रैक्टर-ट्राली और अन्य साधन तैनात कर दिए हैं। ग्रामीणों ने इस सतर्कता के लिए प्रशासन का आभार जताया है। साथ ही उन्होंने प्रदेश सरकार और प्रशासन से अपील की है कि कमजोर तटबंधों को तुरंत मजबूत किया जाए और रास्तों को दुरुस्त कर मिट्टी, थैले, मशीनों व अन्य उपकरणों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि रास्तों में गड्ढों के कारण ट्रालियां समय पर तटबंध तक नहीं पहुंच पातीं, जिससे किसी भी दरार की स्थिति में बड़ा खतरा पैदा हो सकता है।