सेना की भर्ती के लिए अभ्यास करते विद्यार्थी।
- फोटो : Sirsa
सिरसा। एक ऐसा गांव, जिसके हर बच्चे में सेना में जाने का जुनून है। इसीलिए सुबह से ही दौड़-धूप शुरू हो जाती है। सेना में जाने का जज्बा यूं नहीं आया आया। इसका मुख्य कारण गांव का अनोखा स्कूल भी है। जिसमें बच्चे आर्मी की वर्दी में आते हैं और सेना में जाने के लिए प्रेरित होते हैं। स्कूल में पांच साल तक विद्यार्थियों को सेना में भर्ती होने की ट्रेनिंग भी दी गई। अब पासआउट विद्यार्थी बाहर अपनी ट्रेनिंग जारी रखे हैं। हम बात कर रहे हैं जिले के गांव पाना की, जहां से अभी तक 17 युवा सेना में भर्ती हो देशसेवा कर रहे हैं। इनमें से दो अपनी सेवा पूरी कर सेवानिवृत्त भी हो गए हैं। उन्हीं से प्रेरणा ले अब गांव का हर बच्चा सेना में जाने का जुनून रखता है।
यूं तो देश के हर वर्ग के बच्चे में देशभक्ति की भावना है और हर कोई सेना में जाकर देश सेवा करना चाहता है। लेकिन गांव पाना इसके लिए मशहूर है। यहां के हर युवा से लेकर बच्चे-बच्चे में देश सेवा के प्रति लगाव है और सेना में जाने का जुनून है। इसलिए गांव के युवा स्कूल समय से ही कड़ी ट्रेनिंग शुरू कर देते हैं। सुबह-शाम गांव में विशेष कैंप आयोजित होते हैं। जब भी सेना में भर्ती होती है तो ऐसा कभी नहीं होता कि यहां से कोई भर्ती में भाग लेने ना जाए। गांव के हर बच्चे में जोश है और सेना में जाने की ललक भी। अभी तक गांव के 17 युवा सफलतापूर्वक देश की सेना में जा चुके हैं। वे जब भी छुट्टियों में गांव आते हैं तो दूसरे युवाओं को प्रेरित करते हैं और ट्रेनिंग भी देते हैं। इस समय गांव में राजबीर सिंह युवाओं को सेना में भर्ती होने की ट्रेनिंग दे रहे हैं। वे स्वयं भी सेना में भर्ती होने की प्रक्रिया में शामिल है। दौड़ पूरी कर चुके हैं, अब टेस्ट होने बाकी है, जो कोरोना के कारण बीच में रुके पड़े हैं।
गांव का अनोखा स्कूल : यहां सेना और स्काउट की वर्दी मे आते हैं विद्यार्थी
गांव पाना के युवाओं में देश सेवा की भावना यूं नहीं पनपी। इसमें गांव के राजकीय स्कूल का भी महत्वपूर्ण योगदान है और साथ ही सेना में भर्ती होने की ललक पैदा करने वाले तत्कालीन प्रिंसिपल स्काउट मास्टर पलविंद्र शास्त्री की भी मेहनत है। अपने प्रिंसिपल के कार्यकाल के दौरान पलविंद्र शास्त्री ने बच्चों की वर्दी ही सेना की लागू कर दी। तीन दिन बच्चे सेना की वर्दी जबकि तीन दिन स्काउट की वर्दी पहनकर स्कूल आते। हालांकि पलविंद्र शास्त्री अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं लेकिन अभी भी यही ड्रेस कोड स्कूल में लागू है। पलविंद्र शास्त्री ने अपने कार्यकाल में स्कूल में ही विद्यार्थियों के लिए सेना की ट्रेनिंग की व्यवस्था की थी। जो कि करीब पांच साल तक चली। हालांकि अब स्काउट मास्टर ना होने के कारण ट्रेनिंग रुक गई है। लेकिन उस समय के जो विद्यार्थी पासआउट हो गए, उनमें सेना में जाने का जज्बा अब भी बरकरार है। वे गांव में अब राजबीर सिंह के नेतृत्व में ट्रेनिंग ले रहे हैं। इस समय राजबीर करीब 15-20 युवाओं को प्रतिदिन सेना में जाने के लिए प्रशिक्षण देते हैं।
स्कूल में स्टाफ की समस्या है और स्काउट मास्टर भी अब नहीं है। इसलिए ट्रेनिंग रुक गई है। हालांकि अभी भी स्कूल के विद्यार्थी सेना की वर्दी में ही आते हैं और उनमें देश सेवा के प्रति जुनून है।
-हरभगवान, प्रिंसिपल, राजकीय विद्यालय, गांव पाना।
सेना की भर्ती के लिए अभ्यास करते विद्यार्थी।- फोटो : Sirsa