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डेरे ने बदल दी ‘थर्ड जेंडर’ की जिंदगी

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 किन्नरों के उत्थान के लिए चलाई गई डेरा सच्चा सौदा की मुहिम रंग लाई है। डेरा प्रेमी की ओर से डाली गई याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें तीसरे लिंग के रूप में मान्यता देने और नौकरी व शिक्षा में आरक्षण देने के आदेश जारी किए हैं।
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 कोर्ट के इस फैसले का डेरा सच्चा सौदा की ओर से स्वागत करते हुए कहा गया है कि अब यह समाज भी सिर उठाकर अपनी जिंदगी जी सकेगा। किन्नर समाज के कई सदस्यों ने भी डेरा प्रमुख संत गुरमीत राम रहीम सिंह इंसां से मुलाकात कर उनका आभार जताया।

डेरा प्रवक्ता पवन इंसां ने कहा कि वर्षों से उपेक्षित किन्नर समाज को समाज में बराबरी का हक दिलवाने के लिए यह अभियान चलाया गया था। डेरे ने किन्नर समाज को सम्मानजनक नाम ‘सुखदुआ समाज’ प्रदान किया।
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 इसके साथ किन्नर बच्चाें को सामान्य बच्चाें की तरह शिक्षा दिलवाने और भिक्षावृत्ति के स्थान पर उन्हें भी नौकरियों व शिक्षा में बराबरी का दर्जा दिए जाने का मुद्दा उठाया गया। संत के दिशा निर्देशन में माता नसीब कौर इंसां वुमन वेलफेयर सोसायटी द्वारा 2013 में एक जनहित याचिका दायर की गई थी।

 उक्त याचिका पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए किन्नराें को थर्ड जेंडर के रूप में मान्यता दिए जाने, ओबीसी के तहत आरक्षण देने और संविधान में प्रदत्त एक सामान्य नागरिक के अधिकार देने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है।


डेरा सच्चा सौदा के प्रवक्ता पवन इंसां ने कहा कि सदियाें से उपेक्षित किन्नर समाज की सुध लेते हुए गुरु जी ने उन्हें सम्मानजनक स्थान दिलवाने के लिए पहल की। किन्नरों की दशा सुधारने, उन्हें समाज की मुख्यधारा के साथ जोड़ने और विशेष अधिकार देने के लिए डेरा सच्चा सौदा द्वारा किया गया प्रयास मील का पत्थर साबित हुआ है।

 अब भारत दुनिया का पहला ऐसा राष्ट्र बन गया है जहां पर पुरुष और स्त्री के इलावा किन्नरों को तीसरे लिंग के रूप में मान्यता मिलेगी।


डेरा प्रवक्ता पवन इंसां ने बताया कि डेरा सच्चा सौदा द्वारा संत गुरमीत राम रहीम सिंह इंसां के मार्गदर्शन में मानवता भलाई के 101 कार्य किए जा रहे हैं। इनमें से एक किन्नरों की दयनीय दशा सुधारने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए गुरु जी ने 14 नवंबर 2009 को एक ऐतिहासिक मुहिम का ऐलान किया था।

 इस मुहिम के अंतर्गत किन्नरों को समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए डेरा सच्चा सौदा द्वारा विशेष अभियान चलाया गया। किन्नर समुदाय के बच्चाें को शिक्षित करने का बीड़ा उठाते हुए संत गुरमीत ने उनके लिए निशुल्क शिक्षा का प्रबंध किया ताकि वे इज्जत से भरी जिंदगी जी सकें।

 ऐसे करीब 10 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे किन्नर समाज को रोजगार दिलाने के लिए उन्हें विभिन्न ट्रेड में प्रशिक्षित भी करवाएंगे।


प्रवक्ता ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के तहत सरकारी दस्तावेजों में पुरुष, महिला के अलावा अब किन्नराें के लिए अलग से कॉलम होगा, सार्वजनिक स्थलों पर किन्नर समुदाय के लिए टॉयलेट की भी अलग से सुविधा उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए गए हैं।  
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