हितेश चतुर्वेदी
सामान्य अस्पताल में चूहों की भरमार से वहां रैबीज फैलने का खतरा बना हुआ है। अस्पताल में उपचाराधीन कई लोगों को चूहों द्वारा काटे जाने के बाद बचाव के लिए रैबीज का टीका लगना पड़ा। रैबीज के खतरे को भांपते हुए मेडिकल वार्ड की स्टॉफ नर्स रैबीज का टीका लगवा रही हैं।
एक स्टॉफ नर्स ने बताया कि वार्ड में हर जगह काफी संख्या में चूहे इधर-उधर घूमते हैं। दवा और खाने-पीने की चीजों पर चूहे मुंह मारते हैं और रात को चूहे के काटने का डर सताता है। काफी बार चूहों को यहां भगाने के लिए दवा रखी गई लेकिन कोई लाभ नहीं हो रहा।
मजबूरन रैबीज का टीका लगवाया ताकि इस खतरनाक बीमारी से दूर रहा जा सके। सोमवार दोपहर मेडिकल वार्ड के परिचारिका कक्ष का नजारा बड़ा चौंकाने वाला देखने को मिला। चूहों की फौज रोगियाें को दी जाने वाली दवा और टीकों के ऊपर घूम रही थी। कुछ चूहे बर्तनों पर चढ़े हुए दिखाई दिए। तेजी इसे इधर-उधर हो रहे चूहों को कैमरे में कैद किया गया।
इमरजेंसी वार्ड में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर दीपक से जब इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने बताया रैबीज एक बेहद खतरनाक बीमारी है। यह एक जानलेवा वायरस है जो किसी जानवर के काटने से हमारे शरीर में दाखिल हो सकता है।
उन्होंने कहा कि कुत्ते से ज्यादा खतरनाक चूहे का काटा जाना होता है। प्लेग जैसी बीमारी भी चूहों से फैली थी। सरकारी अस्पताल में रैबीज का टीका 100 रुपये में लगाया जाता है और निजी अस्पतालों में 250 से 300 रुपये तक रोगी से वसूल किए जाते हैं।
डॉ. दीपक ने बताया कि रैबीज के पांच टीके कुछ-कुछ अंतराल मेें लगाए जाना अनिवार्य होता है। जानवर द्वारा काटे गए हिस्से को सबसे पहले पानी से खूब अच्छी तरह धोएं और वहां पट्टी कतई न बांधें। फिर तुरंत टिटनेस का टीका लगावाएं और पहला एंटी-रेबीज इंजेक्शन 24 घंटे के भीतर जरूर लगवाना चाहिए।
दोपहर को सर्जिकल वार्ड का जायजा ले रही एमएस डॉ. सुभाषिनी को जब बताया कि अस्पताल में चूहों की भरमार है। उन्होंने कहा ऐसा नहीं हो सकता। यहां साफ सफाई का काफी ध्यान रखा जाता है।
चूहों को भगाने के लिए समय-समय पर दवा का प्रयोग किया जाता है। इस दवा को खाकर चूहा बाहर जाकर मर जाता है। मेडिकल वार्ड में चूहों की ली गई तस्वीरों को देखकर एमएस चकित रह गई और तुरंत कर्मचारियों को वार्ड में दवा का छिड़काव करने का आदेश दिया।