ओढां। शादी का नाम आते ही दहेज के रूप में दिया जाने वाला खर्च सामने आ जाता है, लेकिन असल मायने में बेटी से बढ़कर कोई दहेज नहीं होता। इसका एक उदाहरण गांव नुहियांवाली में देखने को मिला। गांव घोड़ांवाली निवासी शिक्षक शीशपाल छापौला के बेटे अरुण की शादी गांव नुहियांवाली निवासी डॉ. राजपाल वर्मा की बेटी रेणू के साथ रखी थी। राजपाल ने अपनी बेटी की शादी में थाली में दहेज के रूप में बड़ी राशि रखनी चाही थी, लेकिन जब थाली उठाने की बात आई तो शीशपाल ने यह कहकर एक रुपया व नारियल उठाया कि बेटी से बढ़कर कोई दान नहीं है।
इस पर समारोह में शामिल लोगों ने कहा कि काश समाज मेें हर किसी की सोच शीशपाल जैसी हो तो दहेज प्रथा पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लग जाएगा। इस शादी में मुख्य बात यह भी देखने को मिली कि शीशपाल ने भात के रूप में भी कोई नकदी नहीं ली। अध्यापक शीशपाल छापौला ने बताया कि अब समाज में बदलाव आने लगा है। शीशपाल छापौला का यह कार्य दहेज लोभियों के लिए एक संदेश साबित होगा।