हरियाणा के सिरसा में चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय के गुमनाम चिट्ठी मामले की अभी तक की जांच कर रही पुलिस की स्पेशल टीम को प्रोफेसर द्वारा छात्राओं के साथ छेड़छाड़ करने संबंधी कोई तथ्य प्राप्त नहीं हुए हैं। संबंधित विभाग की 539 में से 470 छात्राओं के बयान पुलिस की टीम दर्ज कर चुकी है। इसका खुलासा स्पेशल टीम की इंचार्ज एएसपी दीप्ति गर्ग ने किया।
शुक्रवार को पत्रकारों से रूबरू होते हुए उन्होंने गुमनाम चिट्ठी मामले में विस्तृत जानकारी दी। हालांकि अभी तक इस मामले में 69 छात्राओं के बयान दर्ज होने बाकी हैं। वहीं एएसपी ने बताया कि प्रोफेसर और छात्राओं ने जानकारी दी है कि विवि में पहले भी कुछ लोग इस तरह की हरकतें कर चुके हैं। ऐसे में इसी पहलू पर पुलिस की कार्रवाई जारी रहेगी।
एएसपी दीप्ति गर्ग के अनुसार अभी तक की जांच में जहां टीम को छेड़छाड़ संबंधी कोई पुष्टि नहीं हुई है। वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से पुलिस को शिकायत भी प्राप्त हुई है। भले ही पुलिस को इस मामले में छेड़छाड़ जैसा कुछ न मिले, लेकिन पुलिस प्रशासन को गुमनाम चिट्ठी भेजने वाले तक पहुंचना बेहद जरूरी हो गया है।
विवि प्रशासन के शिक्षक से लेकर गैर शिक्षक कर्मचारी और छात्र संगठन तक निष्पक्ष जांच की मांग कर चुके हैं। ऐसे में गुमनाम चिट्ठी भेजने वाले पर कार्रवाई करने का दबाव पुलिस प्रशासन पर बना हुआ है। वहीं विशेष टीम की सदस्य सिरसा महिला थाना प्रभारी इंस्पेक्टर घनश्याम व इंस्पेक्टर सर्वजीत कौर मौजूद रहे।
यूजी और मास्टर डिग्री की छात्राओं के बयान दर्ज किए
स्पेशल जांच टीम की इंचार्ज दीप्ति गर्ग ने बताया कि जिस विभाग के प्रोफेसर पर गुमनाम चिट्ठी में आरोप लगाए गए थे उस विभाग में कई छात्राएं मास्टर डिग्री भी कर रही थीं। उन छात्राओं के साथ संबंधित मामले में बयान दर्ज किए गए हैं। इतना ही नहीं, विवि की 13 महिला प्रोफेसर व गैर शिक्षक कर्मचारियों के बयान भी दर्ज किए गए हैं।
सीसीटीवी फुटेज डिलीट करने की बात निकली झूठी
गुमनाम पत्र में प्रोफेसर द्वारा अपने कक्ष में लगे कैमरे की फुटेज डिलीट करने की बात कही गई है। यह बात भी साइबर और स्पेशल टीम की जांच के दौरान झूठी पाई गई। जांच के दौरान सामने आया कि प्रोफेसर के कमरे में कोई कैमरा नहीं लगा हुआ था। कक्ष के बाहर लगे हुए कैमरे की साइबर सेल ने जांच की तो उसमें किसी भी तरह की छेड़खानी फुटेज में नहीं मिली। इतना नहीं कोई फुटेज भी डिलीट नहीं की हुई थी।
पुराने सभी मामलों के दस्तावेज ले गई टीम
जानकारी के अनुसार पुलिस की स्पेशल टीम ने पूर्व में सामने आए गुमनाम चिट्ठी जैसे मामलों के दस्तावेज ले लिए हैं। इन दस्तावेजों के आधार पर पुलिस की टीम जांच करने में जुटी है। जिससे गुमनाम चिट्ठी भेजने वाले मामले की तह तक पहुंचा जा सके।
लीगल सेल कर रही है मामले की जांच
एक माह पहले दो रिसर्च स्कॉलर को एडमिशन न देने को लेकर विवि प्रशासन को लीगल नोटिस भेजा गया था। विवि प्रशासन ने जब मामले की जांच की तो सामने आया कि छात्रों ने कोई लीगल नोटिस नहीं भेजा है। जिसके बाद विवि प्रशासन ने इस मामले की जांच शुरू कर दी और आज भी मामला लीगल सेल के पास विचाराधीन है। जानकारी के अनुसार इस मामले में लीगल सेल जल्द ही आगामी कार्रवाई करेगी।