सिरसा। सीडीएलयू की प्रोफेसर मोनिका वर्मा ने आत्मविश्वास से कोरोना को मात दी। हालांकि संक्रमण के दौर में अकेले रहने के कारण एक समय ऐसा भी आया कि जब सोचा लिया कि अंतिम समय नजदीक है, उसकी वजह से किसी को परेशानी न हो, इसलिए घर और कार्यालय के बकाया काम निपटाने शुुरू कर दिए। अकेले होने के कारण बेटे की परवरिश की चिंता भी सताने लगी। इस दौरान एक पीएचडी स्कॉलर के सिख परिवार ने बेटे का 10 दिन तक पालन पोषण किया। मैं जिंदगी भर उनका कर्ज नहीं उतार सकूंगी।
प्रोफेसर मोनिका वर्मा ने बताया कि दो अप्रैल को कोरोना संक्रमित होने के बाद वह घर पर ही क्वारंटीन हो गई। बेटा हिमाचल के बोर्डिंग स्कूल में पढ़ता था और भाई का परिवार भी कोरोना संक्रमित हो गया। इसी बीच मानसिक तनाव ने घेर लिया। न टीवी देखना अच्छा लगता था और न ही पूजा-पाठ में मन लगता। फिर आत्मविश्वास से कोरोना को हराने का फैसला किया। वीसी अजमेर सिंह मलिक, प्रोफेसर अनु शुक्ला, पीए ओमदा और डॉ. सहर्ष हर रोज फोन पर हाल-चाल पूछते।
प्रोफेसर मोनिका वर्मा ने बताया कि बेटा हिमाचल के बोर्डिंग स्कूल में पढ़ता है, इसलिए उसे अपने बीमार होने की सूचना नहीं दी। एक दिन स्कूल में फोन किया तो रो-रो कर बुरा हाल हो गया। स्कूल प्रबंधन ने इस हालात में बेटे से बात न करने की सलाह दी। इसी बीच बोर्डिंग स्कूल में संक्रमण के केस आ गए। प्रबंधन ने स्कूल को बंद करने का फैसला लिया। मैं कोरोना संक्रमित थी, इसलिए उसे लेने जा नहीं सकती थी। इस बात का पता मेरे एक पीएचडी स्कॉलर को लगा तो वह गाड़ी को सैनिटाइज करवाने के बाद बेटे को बोर्डिंग स्कूल से लेकर सिरसा पहुंचा। बेटे को घर नहीं रख सकती थी, ऐसे में पीएचडी स्कॉलर के पिता मेवा सिंह और माता सुरेंद्र कौर ने उसके बेटे को परिवार के सदस्य की तरह रखा और दस दिनों तक पूरा लाड़ प्यार किया।