सिरसा से पर्यावरण को लेकर चिंताजनक खबर सामने आई है। जिले में एक्यूआई 156 पहुंच गया है। प्रदूषण का स्तर बढ़ने से आंखों में जलन होने लगी है। अभी धान की कटाई और नरमे की चुगाई का काम चल रहा है। लेकिन खराब हुए मौसम के कारण दोनों ही कामों में बाधा आने लगी है, जिससे किसान चिंतित हैं।
जिले में धान कटाई का कार्य जोरों पर है। अभी से पर्यावरण प्रदूषित होना शुरू हो चुका है। सिरसा शहर में एयर क्वाल्टी इंडेक्स अब 156 पर पहुंच गया है। जबकि आसमान में धुआं (स्मॉग) के कारण अब लोगों को सांस लेने के तकलीफ और आंखों में जलन होने लगी है। वहीं, मौसम खराब होने और हल्की बूंदाबांदी के कारण ठंड भी बढ़ने लगी है। रविवार को अधिकतम तापमान 26 और न्यूनतम 23 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। तापमान में गिरावट होने के कारण ठंड का स्तर भी पहले से बढ़ना शुरू हो चुका है। दिनभर मौसम खराब होने के कारण धूप नहीं निकल सकी। मौसम विभाग के अनुसार सोमवार को जिले में बारिश होने की संभावना जताई जा रही है।
किसानों की बढ़ी परेशानी, फसलों को हो रहा नुकसान
सुबह से आसमान में बादल छाने के बाद हल्की बूंदाबांदी ने किसानों की समस्या को भी पहले से बढ़ा दिया है। किसान धान की कटाई करने का काम कर रहे हैं। लेकिन मौसम खराब होने के कारण धान में नमी बढ़ने से किसानों को अब धान कटाई का कार्य भी रोकना पड़ रहा है। वहीं, नरमे की फसल की चुगाई का काम चल रहा है। किसानों को वह भी काम रोकना पड़ा रहा है। ऐसे में अगर अधिक बारिश होती है, तो किसानों को इसका काफी नुकसान भी उठाना पड़ेगा।
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कंट्रोल रूम में रविवार को आई आग लगने की दो शिकायतें
धान की कटाई के बाद किसान धान के अवशेषों को न जलाएं। इसके लिए लगातार कृषि विभाग की टीमें किसानों को जागरूक कर रही हैं। अगर कोई किसान धान की पराली को आग के हवाले करता है, तो उसकी शिकायत करने के लिए प्रशासन की ओर से कंट्रोल रूम बनाया गया है। कंट्रोल रूम में रविवार को दो शिकायतें पहुंची हैं। एक शिकायत गांव रत्ताखेड़ा और दूसरी देसूमलकाना में किसानों की ओर से धान के अवशेषों को आग के हवाले करने की पहुंची है। जिसके बाद कंट्रोल रूम के कर्मचारियों ने क्षेत्र के संबंधित अधिकारियों को मामले की जानकारी दी है।
धान की पराली को किसान आग के हवाले न करके उसे मिट्टी में मिलाएं। इसके लिए किसानों को नई मशीनें भी उपलब्ध करवाई जा रही हैं। धान की कटाई का अभी काम चल रहा है। धान के अवशेषों को जमीन से मिलाने के बाद उपजाऊ शक्ति भी बढ़ती है।
-डॉ. बाबूलाल, कृषि उपनिदेशक, सिरसा