डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम ने सुनारिया जेल से अनुयायियों के लिए अब 9वां पत्र भेजा है, जिसमें उन्होंने अपने बेटे व बेटियों के बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने की अनुमति दी है। वहीं उन्होंने पंजाब में चल रहे दो मामलों का जवाब देते हुए लिखा है कि हमने कभी भी किसी भी धर्म की निंदा, बेअदबी या बुराई करनी तो दूर ऐसी कभी कल्पना भी नहीं की। बल्कि हम तो खुद सर्वधर्म का सत्कार करते हैं व सबको सत्कार करने की शिक्षा देते हैं। डेरा में आपसी कलह की बात को अफवाह मानते हुए उन्होंने लिखा है कि परिवार और सेवादार एक साथ हैं।
रविवार को डेरा सच्चा सौदा में साध-संगत को यह पत्र पढ़कर सुनाया गया। जिसके बाद अनुयायियों में भी काफी उत्साह देखने को मिला। वहीं डेरा प्रमुख ने रूस व यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के जल्द खत्म होने और विश्व में शांति स्थापना की प्रार्थना की और साध-संगत से भी ऐसा करने का आह्वान किया।
पत्र में डेरा प्रमुख ने पत्र लिखा कि अप्रैल में डेरा सच्चा सौदा के स्थापना दिवस का भंडारा लगाया जाता है। पता चला है कि साध-संगत अप्रैल में रोहतक में भी सफाई महाअभियान करना चाहती है। इसलिए डेरा सच्चा सौदा के चेयरपर्सन डॉ. पीआर नैन इन्सां व जिम्मेदार प्रशासनिक अनुमति लेकर यह सेवा कर लें।
पत्र में लिखा : 21 दिन गुरुग्राम में व्यतीत की फरलो, लेकिन आपके दर्शन करने की थी इच्छा
वहीं डेरा प्रमुख की ओर से लिखे पत्र में उन्होंने शुरुआत गुरुग्राम के आश्रम में 21 दिन फरलो व्यतीत करने की बात कही है। उन्होंने लिखा कि गुरुग्राम में फरलो तो काट रहे थे लेकिन उनका ध्यान हरदम करोड़ों में रहा और आपके दर्शन करने की भी इच्छा रही। (राज में राजी सो मर्द गाजी) लिखकर उन्होंने सरकार पर भी निशाना साधा है।
वहीं डेरा प्रमुख ने छह मार्च को साध-संगत द्वारा गुरुग्राम में चलाए गए सफाई महाअभियान की प्रशंसा करते हुए लिखा कि हमारे गुरुग्राम से आने के बाद संगत ने गुरुग्राम में सफाई महाअभियान चला कर श्रद्धा की मिसाल कायम की है। पत्र के माध्यम से साध-संगत को सचेत करते हुए डेरा प्रमुख ने लिखा कि सारे सेवादार व एडम ब्लॉक सेवादार, जसमीत, चरणप्रीत, हनीप्रीत, अमरप्रीत सब एक हैं व उनकी बातों पर (वचनों पर) चलते हैं। वहीं उन्होंने आश्रम में भी सेवादारों को आने की बात कही है।
रोहतक से एक साथ ही वापस लौटे थे परिवार के सदस्य
पत्र में उन्होंने लिखा कि फरलो खत्म होने के बाद जसमीत, चरणप्रीत, हनीप्रीत व अमरप्रीत चारों रोहतक इकट्ठे छोड़ने आए व वापस भी इकट्ठे गए। जसमीत, चरणप्रीत व अमरप्रीत ने आज्ञा ली है कि उच्च शिक्षा प्राप्ति के लिए वे अपने बच्चों के साथ उन्हें पढ़ाने जाएंगे।
जिसके लिए उन्होंने पत्र में लिखकर अनुमति दी है। हालांकि डेरा प्रमुख की ओर से परिवार के सदस्यों के पहली बार पत्र में नाम लिखे गए हैं और सभी के एक साथ होने की बात कही गई है। वहीं उन्होंने दूसरे बहकावों में न आने को लेकर भी अनुयायियों को संदेश दिया है।