सिरसा। गेहूं की सरकारी की खरीद एक अप्रैल से शुरू होगी। लेकिन अभी तक गेहूं के उठान और सुरक्षा को लेकर अधिकारियों की ओर से कोई भी तैयारी नहीं की गई है। मंडी में हर वर्ष उठान को लेकर किसानों और आढ़तियों को परेशानी उठानी पड़ती है। जिसके कारण आढ़तियों की ओर से मंडी को भी बंद करने पर मजबूर होना पड़ता है। सुरक्षा और उठान को लेकर आढ़तियों की ओर से 28 मार्च को अधिकारियों व ठेकेदार के साथ बैठक की जाएगी।
गेहूं की आवक को लेकर बेशक जिला प्रशासन व मार्केट कमेटी अधिकारी व्यवस्था के दावे कर रहे हों। लेकिन इसके बाद भी हर वर्ष गेहूं का उठान और गेहूं चोरी होने की परेशानी किसानों और आढ़तियों के सामने आती है। सरकारी खरीद को लेकर सरकार की ओर से 64 खरीद बनाए गए हैं। इनमें चार एजेंसियों की ओर से खरीद की जाएगी। हालांकि अभी मंडियों में 7 से 10 अप्रैल तक गेहूं की आवक होने की उम्मीद है। गेहूं तैयार होने के बाद कटाई करवा किसान सीधा मंडी में गेहूं लेकर पहुंचते है। आवक अधिक होने के कारण मंडी में पूरी तरह से अट जाती है। गेहूं का तोल लगाने के लिए मजदूरों की ओर से मंडी में ही बड़े बड़े ढेर लगा दिए जाते हैं। वहीं बात गेहूं की ढेरियों की सुरक्षा को लेकर करें, तो अनाज मंडी में बेसहारा पशुओं की भरमार लग जाती है। गेहूं की ढेरियों में बेसहारा पशु विचरण करते रहते हैं, जिन्हें किसान खुद ही भगाते रहते हैं। वहीं रात को गेहूं की चोरी होने का भी किसानों को डर सताता रहता है। हालांकि इस समस्या को लेकर आढ़तियों का मानना है कि जब गेहूं आने का समय होगा तो हम चौकीदार की व्यवस्था भी करेंगे। बता दें की सीजन के दौरान मंडी में करीब 24 लाख क्विंटल गेहूं की खरीद होती है।
सरकार ने इस वर्ष गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2015 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। लेकिन मार्केट में इस समय गेहूं का दाम 2100 से 2200 रुपये तक चल रहा है। वहीं कुछ व्यापारियों का मानना है कि इस बार गेहूं के दाम 2500 रुपये प्रति क्विंटल तक जा सकते हैं। ऐसे में गेहूं मंडी में पहुंचने के बाद भी किसानों को इसका दाम सरकारी दाम से अधिक मिलता है तो किसान निजी फर्मों गेहूं बेचने की प्राथमिकता देंगे।
अनाज की सुरक्षा के लिए नहीं चौकीदार की व्यवस्था
करीब 52 एकड़ में जिले की अनाज मंडी के 20 गेट है, लेकिन अनाज की सुरक्षा के लिए एक भी चौकीदार की व्यवस्था नहीं की गई। मार्केट कमेटी के अधिकारियों के अनुसार चौकीदार की व्यवस्था करना कच्चे आढ़तियों की जिम्मेवारी है। लेकिन उनके द्वारा सरकार व प्रशासन को इस विषय में अवगत करवा दिया गया है।
मंडी में बने हैं 9 शेड, फिर भी बारिश में भीगती है गेहूं
अनाज मंडी में इस समय कुल 9 शेड है जो खराब मौसम से फसल को बचाने के लिए पर्याप्त नहीं है। क्योंकि बारिश के दौरान बहुत सा अनाज भीग जाता है। यहां तक खरीदे गए गेहूं की बोरियां भी भीग जाती हैं। शेड पर्याप्त नहीं और तिरपाल की व्यवस्था समय पर नहीं हो पाती। ऐसे में मार्केट कमेटी के अधिकारी ने आढ़तियों को तिरपाल की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी दी है।
मंडी के 11 वाटर कूलर, एक अभी खस्ताहाल
अनाज मंडी में करीब 11 वाटर कूलर लगे हैं। हालांकि इनमें से एक कपास मंडी में स्थित है उसकी मरम्मत अभी तक नहीं हो पाई है। जिसमें पानी भी नहीं है और नल भी टूट चुके हैं। वहीं मंडी में कुछ सामाजिक संस्थाओं की तरफ से भी वाटर कूलर लगवाए हैं।
तीन टोकन प्वाइंट बनेंगे
मंडी में गेहूं की आवक को लेकर तीन टोकन प्वाइंट बनाए गए हैं। जिनमें कंप्यूटर सहित डाटा एंट्री ऑपरेटर नियुक्त किया जाएगा। ताकि प्रत्येक वाहनों की एंट्री सही तरीके से हो सके। अलग अलग क्षेत्रों से पहुंचने वाले गेहूं की ट्रॉलियों की एंट्री के बाद टोकन काटे जाएंगे।
ट्रक यूनियन के ठेकेदारों से बात हुई है जो करीब 150 ट्रक होने का दावा कर रहा है। इसलिए सोमवार को उनके साथ बैठक होगी। जिसमें इस मुद्दे पर विचार किया जाएगा और इस बार प्रयास रहेगा कि उठान कार्य जल्द से जल्द हो। जैसे ही गेहूं की आवक होगी उसी दौरान चौकीदार की व्यवस्था भी कर दी जाएगी।
-मनोहर लाल, प्रधान आढ़तियान एसोसिएशन।
मंडी में पेयजल की व्यवस्था पूरी तरह से ठीक की जा चुकी है और इसके अलावा कहीं भी कोई समस्या है, उसे दुरुस्त किया जा रहा है। सफाई व्यवस्था से लेकर किसानों के ठहरने व खाने पीने के लिए किसान भवन में व्यवस्था की गई है।
-वीरेंद्र मेहता, सचिव, मार्केट कमेटी सिरसा।