डबवाली। भारत माला राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-54) से सटे 9 गांवों के किसानों के लिए हर साल बारिश आफत बनकर आती है। गांव चौटाला, आसाखेडा, सकता खेड़ा, अबूबशहर, जोगेवाला, और डबवाली सहित अन्य गांवों में राजमार्ग के बारिश के पानी की निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण किसानों की धान और कपास की फसलें हर साल बर्बाद हो जाती हैं। वीरवार को हुई बारिश से गांव चौटाला के किसान संत राम देहडू, दूला राम, अमन देहडू के खेतों में पानी घुस गया, जिससे धान की फसलें डूब गईं।
किसान नेता राकेश फगोड़िया और प्रभावित किसानों का कहना है कि हाईवे के पानी की निकासी की व्यवस्था सही नहीं है। ड्रेनों के माध्यम से पानी को जमीनी स्तर पर जाने के बजाय वह सीधे किसानों के खेतों में घुस जाता है, जिससे फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो जाती हैं। किसानों का आरोप है कि राजमार्ग का निर्माण करने वाली कंपनी वीआरसी की लापरवाही और कुप्रबंधन ही इस समस्या की जड़ है। कंपनी ने पानी निकासी के लिए पर्याप्त और स्थायी समाधान नहीं किया है, जिसके कारण हर मानसून में किसान अपनी फसलें गंवा रहे हैं।
किसानों का कहना है कि वे बार-बार हाईवे प्रशासन से व्यवस्था बनाने की मांग कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं हुआ है। किसान नेता राकेश फगोड़िया ने चेतावनी दी है कि यदि संबंधित कंपनी दो दिनों के भीतर समस्या का स्थायी समाधान नहीं करती और किसानों की बर्बाद हुई फसलों का मुआवजा नहीं देती, तो किसान शनिवार 28 जून से मोर्चा खोल देंगे। किसानों द्वारा गांव चौटाला स्थित टोल बैरियर पर धरना दिया जाएगा और यदि उनकी आवाज नहीं सुनी गई, तो वाहनों को टोल फ्री कराएंगे।
किसानों की मुख्य मांगें
- पानी निकासी के लिए बनी ड्रेनों को तत्काल ठीक किया जाए।
- बरसाती पानी के लिए बनाए गए जमीनी बोर भी दुरुस्त करवाए जाएं।