सुनील बैनीवाल
सिरसा। प्रदेश में लाल डोरे की प्रॉपर्टी का सत्यापन कर मालिकाना हक देने की प्रक्रिया का एक साल का वक्त गुजर चुका है। आज भी प्रदेश के कई जिलों में यह प्रक्रिया बेहद धीमी गति से चल रही है। इसकी गवाही 21 जनवरी को जारी हुई रिपोर्ट के आंकड़े देते हैं। रिपोर्ट में सिरसा में महज 6 प्रतिशत ही लाल डोरे की प्रॉपर्टी पर रहने वालों को मालिकाना हक मिला है। वहीं, अंबाला व महेंद्रगढ़ में स्थिति बेहद चिंताजनक है।
सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, पानीपत 37 प्रतिशत प्रॉपर्टी मालिकों को मालिकाना हक देकर पहले तो हिसार दूसरे स्थान पर है। वहीं, सिरसा 19वें स्थान पर आता है। प्रदेश में एक साल बीत जाने के बाद भी औसतन 25 प्रतिशत लोगों को भी मालिकाना हक नहीं मिल पाया है। इसी को लेकर विशेष रूप से मंथन 21 जनवरी को हुई बैठक में किया गया है।
सिरसा में अब तक 50 प्रतिशत प्रॉपर्टी का ही सत्यापन हो पाया है। ऐसा तब है, जब शहर के बड़े एरिया की प्रॉपर्टी लाल डोरे में आती है। कुछ लोगों ने पहले ही लाल डोरे की जमीन की रजिस्ट्री करवाई हुई है। इस डाटा को भी विभाग जमा कर रहा है। सरकार ने 20 सालों से लाल डोरे पर काबिज प्रॉपर्टी मालिकों को मालिकाना हक देने की प्रक्रिया शुरू की हुई है। संवाद